भरतकुमार सोलंकी
जैन धर्म की गहराइयों में उतरने वाला हर साधक नमोकार मंत्र से परिचित हैं। यह केवल मंत्र नहीं, अपितु जीवन को दिशा देने वाला अद्वितीय मार्गदर्शक हैं। नमोकार मंत्र को जैन परंपरा ने “महामंत्र” का स्थान दिया हैं। इसका प्रभाव मात्र शब्दों से नहीं, बल्कि उसके गहरे अर्थों से प्रकट होता हैं।
नमोकार मंत्र का प्रत्येक शब्द हमें विनम्रता, समर्पण और साधना का मार्ग दिखाता है। ”अरिहंतो को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार और लोक के सभी साधुओं को नमस्कार”-इन पंक्तियों में संपूर्ण जैन धर्म के आदर्शों का सार निहित हैं। यह मंत्र अहंकार का विसर्जन हैं, आत्मा को शुद्ध करने का साधन है।
आधुनिक विज्ञान के दृष्टिकोण से भी इस मंत्र की महत्ता को समझने का प्रयास किया गया हैं। रूस के वैज्ञानिक कामेनिएव और किरलियान की खोजें इस ओर संकेत करती हैं कि हमारे विचार और भावनाएं हमारे चारों ओर एक आभामंडल निर्मित करती हैं। किरलियान की “हाई-फ्रिक्वेंसी फोटोग्राफी” से यह स्पष्ट हुआ कि हमारे सकारात्मक विचारों का प्रभाव हमारे आभामंडल पर पड़ता हैं। जब हम नमोकार मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो यह मात्र ध्वनि नहीं होती-यह हमारी चेतना के गहरे स्तर पर प्रभाव डालती हैं, हमारे आभामंडल को शुद्ध करती हैं और हमें पाप से दूर ले जाती हैं।
”एसो पंच नमुक्कारो, सव्वपावप्पणासणो”-यह पंक्ति स्पष्ट रूप से कहती हैं कि यह पांचों नमस्कार सब पापों का नाश करने वाले हैं। यह पाप का नाश केवल बाहरी अर्थों में नहीं, बल्कि हमारे भीतर बसे कुप्रवृत्तियों के रूप में होता हैं। जब हम अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधुओं को नमस्कार करते हैं, तो यह हमारी चेतना को उनसे जोड़ता हैं, जिन्होंने अहंकार, क्रोध, मोह, माया पर विजय प्राप्त की हैं।
आगामी 9 अप्रैल को दुनिया भर के 108 देशों में विश्व नमोकार महामंत्र दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। यह दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि, आत्म-परीक्षण और आत्म-विकास का अवसर है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि नमोकार मंत्र केवल एक जप नहीं, बल्कि हमारे जीवन की धारा को मोड़ने वाली ऊर्जा है।
इस अवसर पर यह समझना भी आवश्यक है कि इसे “नमकार मंत्र” न कहे। यह “नवकार” नहीं है, बल्कि “नमोकार” है-मन का भाव, समर्पण का संकेत। इस मंत्र की शक्ति तभी प्रकट होती है, जब इसे शुद्धता और श्रद्धा से उच्चारित किया जाए।
जब हम नमोकार मंत्र का जाप करेंगे, तब यह केवल ध्वनि नहीं होगी; यह हमारे आभामंडल में सकारात्मकता की तरंगें उत्पन्न करेंगी। यह हमें विनम्रता, समर्पण और सच्चे अर्थों में जैन धर्म के मूलभूत सिद्धांतों से जोड़ने का कार्य करेगी।
तो आइए, इस विश्व नमोकार महामंत्र दिवस पर हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम नमोकार को नमोकार मंत्र ही बनाए रखेंगे-उसे किसी अन्य रूप में न बदलेंगे। इस महामंत्र की महत्ता को समझें, उसके अर्थों को आत्मसात करे और इसे अपने जीवन का अविभाज्य अंग बनाएं।