सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार के निर्देशानुसार वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन ३१ मार्च को सरकारी अवकाश होने के बावजूद संभागीय अधिकारी से लेकर सचिव स्तर तक के अधिकारी मंत्रालय में मौजूद थे। सोमवार को अंतिम दिन विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा १७७ से अधिक शासनादेश जारी किए गए, जो सभी धन वितरण से संबंधित हैं।
विधानमंडल का बजट सत्र २६ मार्च को समाप्त हो गया। तीन सप्ताह के सत्र के तुरंत बाद वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत धनराशि वितरित करने की गहमागहमी शुरू हो गई। वित्तीय वर्ष के अंत में तीन दिन सरकारी छुट्टियां थीं। शनिवार, गुढीपाडवा और ईद। यदि चालू वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत धनराशि ३१ मार्च तक वितरित नहीं की जाती है तो उसे वापस कर दिया जाता है इसलिए छुट्टियों के बावजूद पिछले तीन दिनों से मंत्रालय में अधिकारियों की भीड़ लगी हुई थी।
सोमवार को आखिरी दिन भीड़ थी। मंत्रालय में विभिन्न विभागों का काम आधी रात तक चलता रहता है। अंतिम दिन १७७ से अधिक सरकारी निर्णय जारी किए गए। उनके सभी निर्णय फंड वितरण के बारे में हैं।
हजारों करोड़ रुपए की धनराशि का वितरण
अंतिम दिन हजारों करोड़ रुपए की धनराशि वितरित की गई, जिसमें आदिवासी घटक कार्यक्रम अनुदान, आश्रम विद्यालयों के लिए अनुदान, बाह्य स्रोतों से जनशक्ति आपूर्ति करने वालों को भुगतान, महोत्सवों के लिए अनुदान, सिंचाई परियोजना मरम्मत के लिए अनुदान, बांधों से गाद निकालने वाली संस्थाओं के लिए अनुदान, खेल परिसरों के लिए अनुदान, भारी वर्षा से हुए नुकसान के लिए मुआवजा, भवन निर्माण अनुदान, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थाओं के लिए अनुदान आदि का समावेश है।