– लॉटरी विजेताओं को अब तक नहीं मिला घर
सामना संवाददाता / मुंबई
सिडको कॉर्पोरेशन द्वारा २६,००० मकानों की बिक्री के लिए एक निजी कंपनी को सलाहकार नियुक्त किया गया था। हाल ही में सिडको निदेशक मंडल की बैठक में इस कंपनी को बकाया राशि का भुगतान करने का प्रस्ताव पेश किया। लॉटरी विजेताओं को अभी तक उनके वैध मकानों का कब्जा नहीं मिला है तथा नाम वापसी की प्रक्रिया चल रही है। सिडको के भीतर इस बात पर चर्चा चल रही है कि बिक्री के लिए नियुक्त कंपनी का भुगतान करने में इतनी जल्दी क्यों है, जबकि विभिन्न प्रश्न अनुत्तरित हैं, जैसे कि लॉटरी विजेता घरों के क्षेत्रफल से नाखुश हैं।
सिडको के ५५ साल के इतिहास में पहली बार मकान बेचने के लिए एक निजी परामर्शदाता कंपनी की नियुक्ति की गई है। दूसरी ओर, सिडको ने मकान बेचने के लिए विज्ञापनों पर लाखों रुपए खर्च कर दिए। इसके अलावा, इस परामर्शदाता कंपनी के कर्मचारी सिडको और अन्य सरकारी स्थलों पर भी काम करते थे। फिर भी इस कंपनी पर प्रति घर एक लाख रुपए से अधिक यानि करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार ने सभी सरकारी संस्थाओं को मितव्ययिता बरतने की सलाह दी है। हालांकि, सिडको के कुछ अधिकारी परामर्शदाता कंपनी को भुगतान को लेकर चिंतित हैं। इस कंपनी को शेष भुगतान करने के लिए सिडको के भीतर जोरदार प्रयास चल रहे हैं और निदेशक मंडल ने इस कंपनी को बकाया राशि का भुगतान करने के लिए एक ही महीने में दो बार प्रस्ताव पारित किया। पहला निर्णय ३ मार्च की बैठक में और दूसरा निर्णय २७ मार्च की बैठक में लिया गया। इस कंपनी को करीब ६७० करोड़ रुपए का ठेका दिया गया है। मकान बेचने से पहले इस कंपनी को अग्रिम भुगतान के रूप में १०४ करोड़ रुपए दिए गए थे। ६७,००० घरों में से पहले चरण में २५,७२३ घर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए। चूंकि अब तक १९,५१८ में से ३,००० से अधिक विजेता अपना नाम वापस ले चुके हैं, इसलिए मांग की जा रही है कि १६,५०० घरों में से कितने और लॉटरी विजेता अपना नाम वापस लेंगे, इसका आकलन करने के बाद ही संबंधित कंपनी को भुगतान किया जाए।
शेष मकानों की भी यही कंपनी करेगी बिक्री
सिडको बोर्ड की बैठक में कंपनी को देय राशि के भुगतान के संबंध में कोई नया निर्णय नहीं लिया गया। हालांकि, सिडको ने शेष मकानों की बिक्री के लिए इस कंपनी को पुन: नियुक्त करने का निर्णय लिया है। २५,००० घरों में से १९,००० घर बेचे गये। शेष मकानों को संबंधित कंपनी द्वारा उस समय बेचा जाएगा जब उन्हें बेचने के लिए नई नीलामी प्रक्रिया लागू की जाएगी। संबंधित कंपनी को जो भी राशि दी जाएगी, वह बिल्कुल वैसे ही होगी जैसा कि सहमति हुई थी।
-विजय सिंघल, प्रबंध निदेशक, सिडको बोर्ड