– अकोला जिले के ६० गांंवों में आतंक
– २० किमी दूर से लाना पड़ रहा पेय जल
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार को लोगों के हेल्थ की कोई फिक्र नहीं है। अभी हाल ही में खबर आई थी कि सरकारी राशन का गेहूं खाने से कुछ गांवों के लोग तीन दिन में ही गंजे हो गए। अब खबर आई है कि राज्य के कई गांवों में पानी पीने से लोगों की किडनियां खराब हो रही हैं। अभी तक दर्जनों मरीज सामने आ चुके हैं। बताया जाता है कि उक्त क्षेत्र में पहले मीठा पानी आता था, पर अचानक पिछले कुछ दिनों से वहां का पानी खारा हो गया है।
हैरानी की बात है कि न तो सरकार को लोगों को फिक्र है और न ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ऐसे मामलों के प्रति गंभीर हैं। ये कर्मचारी पूरी तरह से लापरवाही बरतते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ यही हालात अन्य विभागों में भी है। इसी के चलते राज्य में सभी विभागों की व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमराती हुई नजर आ रही हैं। खबर है कि अकोला के करीब ६० गांवों में पानी पीने से कई लोगों की दोनों किडनियां खराब हो रही हैं। इस कारण इन गांवों के लोगों में पानी का आतंक छा गया है।
भीषण गर्मी में हलाकान
भीषण गर्मी में लोग हलाकान हो गए हैं। उन्हें मोटरसाइकिल से १५ से २० किमी दूर-दराज के इलाकों में जाकर मीठा पानी लाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। बालापुर विधानसभा क्षेत्र के सावरपाटी गांव में कुएं और बोरवेल का खारा पानी नागरिक पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
गंभीर समस्या
अकोला जिले के बालापुर तालुका में एक गंभीर समस्या सामने आई है। बालापुर तालुका के सावरपाटी और आसपास के करीब ६० से अधिक गांवों में खारा पानी पीने के कारण कई नागरिकों को किडनी की गंभीर बीमारियां हो गई हैं।
स्वास्थ्य अधिकारी को पता नहीं
खारा पानी पीकर
लोग हो रहे बीमार!
गांववालों में छाई नाराजगी
‘ईडी’ सरकार को लोगों के स्वास्थ्य की बिल्कुल परवाह नहीं है। राज्य के कई गांवों में पानी पीने से लोगों की किडनियां खराब हो रही हैं। मगर सरकार को इसकी सुध नहीं है। गांव का पानी अचानक खारा हो गया, जिससे गांव वालों को किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी विभिन्न बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संदर्भ में जिला स्वास्थ्य अधिकारी दत्तात्रेय गाढवे ने कहा कि मैं इस मामले की जानकारी लेकर जांच करूंगा। उसके बाद ही इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दे पाऊंगा।
बता दें कि सावरपाटी गांव में चार लोगों को इस दूषित पानी के कारण किडनी की बीमारी हो गई है। सबसे दुखद बात यह है कि एक व्यक्ति को तो अपनी किडनी खोनी पड़ी है। सावरपाटी निवासी प्रशांत काले की दोनों किडनी पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। उनके इलाज में अब तक १२ लाख रुपए से अधिक का खर्च आ चुका है। इलाज के लिए उन्होंने अपनी खेती की जमीन भी बेच दी, लेकिन फिर भी पर्याप्त धन जुटा पाना संभव नहीं हो पाया। गांव के कई अन्य नागरिकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। इस मामले में गांव वालों ने प्रशासन की उपेक्षा पर तीखी नाराजगी जताई है।
स्वच्छ पानी की मांग
प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देकर ग्रामीणों को पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। साथ ही यदि प्रशासन ने लापरवाही बरती तो इस इलाके के नागरिकों के स्वास्थ्य को और अधिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
पानी थूक दिया
बालापुर पंचायत समिति के अतिरिक्त ब्लॉक विकास अधिकारी विनोद काले ने इस मामले में गांवों में मेडिकल जांच कराने का आश्वासन दिया। इस दौरान गांव वालों ने उन्हें पानी पिलाया जो बेहद खारा था, जिसे उन्होंने मुंह में लेते ही बाहर थूक दिया।
गंभीर खतरा
जिला स्वास्थ्य अधिकारी दत्तात्रेय गाढवे की उदासीनता से गांव वालों में और अधिक नाराजगी फैल गई है। बालापुर तालुका के सावरपाटी और आसपास के गांवों में खारा पानी नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है।