-पिछले १५ महीने से चल रहा सौंदर्यीकरण का काम
संदीप पांडेय / मुंबई
मुंबई के मालाबार हिल क्षेत्र में हजारों हिंदुओं के श्रद्धास्थान और ऐतिहासिक महत्व वाले प्राचीन बाणगंगा तालाब को पुनर्जीवन देने और सौंदर्यीकरण का काम पिछले १५ महीने से अत्यंत धीमी गति से किया जा रहा है। इसके कारण बाणगंगा तालाब आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों में भारी असंतोष है। आस-पास के रहिवासीr भी इसके कारण नाराज हैं। बाणगंगा तालाब के पुनर्जीवन, सौंदर्यीकरण और नूतनीकरण परियोजना का भूमिपूजन १८ दिसंबर २०२३ को हुआ था। पर्यटन को बढ़ावा देने और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने के लिए मुंबई मनपा ने बाणगंगा के काम को तीन चरणों में करने का निर्णय लिया था। प्रथम चरण में बाणगंगा तालाब की सीढ़ियों की मरम्मत और नूतनीकरण, तालाब के चारों तरफ की दीवारों की मरम्मत, दीपस्तंभ की मरम्मत और नूतनीकरण के साथ ही तालाब की तलहटी में जमी गाद को निकालने का काम किया जाने वाला था। इसके लिए एन.एम. इंप्रâास्ट्रचर और बुकॉन इंजीनियर्स एंड इंप्रâास्ट्रचर प्राइवेट लिमिटेड की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा १८ मीटर तक की सड़क बाणगंगा तालाब तक बनाने का भी प्रस्ताव है ताकि पर्यटकों को तालाब तक पहुंचने में आसानी हो सके। बाणगंगा तालाब क्षेत्र के निर्माणों को भी मनपा ने हाल ही हटा दिया, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यही है कि काम करने की कोई समयसीमा मनपा द्वारा निर्धारित नहीं करने के कारण ठेकेदार द्वारा बहुत ही धीमी गति से काम किया जा रहा है। बाणगंगा देश की प्राचीन व धार्मिक धरोहर है इसलिए भूमिपूजन के वक्त इसके काम को छह महीने के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था और राज्य सरकार ने इस काम को वरीयता देगी, ऐसा बताया गया था, लेकिन बाणगंगा तालाब के पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण का काम अत्यंत मंदगति से चल रहा है।
ज्ञात हो कि पितृपक्ष के समय हजारों की संख्या में लोग बाणगंगा तालाब पर आकर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन अधूरे काम के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।