सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के कालीना स्थित मणिपाड़ा रोड पर बहुप्रतीक्षित स्टॉर्मवॉटर ड्रेन प्रोजेक्ट आखिरकार गति पकड़ता नजर आ रहा है। बरसों से अटके इस कार्य में अब प्रशासन ने दावा किया है कि अप्रैल २०२५ के अंतिम सप्ताह तक अंतिम बाधा भी हटा दी जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि यह बाधा अब तक हटाई क्यों नहीं गई?
रिपोर्ट की मानें तो जिस मकान को अब हटाने की बात की जा रही है, वह करीब ५० साल पुराना है और नाले के निर्धारित मार्ग में स्थित है। इस मकान के कारण न केवल नाले का निर्माण रुका रहा, बल्कि आसपास की सड़क चौड़ीकरण योजना भी अधर में लटकी रही। मुंबई मनपा ने अब जाकर मकान में रहने वाले परिवार से दस्तावेज मांगे हैं और उनकी पात्रता जांच की जा रही है। यदि पात्रता सिद्ध होती है, तो उन्हें वैकल्पिक आवास दिया जाएगा या फिर मुआवजा।
सबसे बड़ी खामी यह है कि प्रशासन ने समय रहते इस समस्या का हल निकालने की कोशिश ही नहीं की। दस्तावेजों की जांच और पुनर्वास की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा सकती थी। नतीजा यह हुआ कि निर्माण वर्षों तक रुका रहा और जनता को असुविधा झेलनी पड़ी।
अब जब जनता और मीडिया का ध्यान इस मुद्दे पर गया, तभी जाकर मनपा हरकत में आई। यह स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक योजना में गंभीर लापरवाही रही है। सवाल यह नहीं कि अब क्या हो रहा है, सवाल यह है कि अब तक क्यों नहीं हुआ?