मां का गुणगान

वर्ष में दो बार आते मां के नवरात्र
मां के भक्त करते मन से इंतजार।
मां के नौ रूपों को पूजते
जगराते करते, हर्षाते गाते।
सुहाना मौसम उत्साह बढ़ाता
भक्तों के मन भक्ति भाव बढ़ जाता।
सज जाते मां के मंदिर और दरबार
दर्शन देती, पूरी करती मन की मुराद।
ढोल, शंख घंटों का नाद
मंगल आरती भजन कीर्तन की आती आवाज।
असीम श्रद्धा विश्वास से करते मां का गुणगान
दुर्गम पहाड़ों पर चढ़ पाते तेरे दर्शन पावन।
ममता भरी मां का जब होता दर्शन
सभी कष्ट भूल जाते जो सहे थे राह भर।
मां का ललाट सूर्य के तेज सा दमकता
मां के नयनों से प्यार का सागर छलकता
मां के नथ की चमकती मुक्ता।
आभूषण, लाल चोला चूनर शोभा पाते
मां के चरणों में चारों धाम मिल जाते।
मां की भक्ति में मिलती सभी खुशियां
मां तू ही भरती सबकी झोलियां।
ऊंचे ऊंचे पहाड़ों वाली मां
दे दर्शन निहाल भक्तों को करो मां।
अष्टम रूप दुर्गाष्टमी माना जाता
कर कन्या पूजन, बेटियों को पूजा जाता
शक्ती रूप हो मां
तुझे सभी नमन करते मां।
-बेला विरदी

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