सामना संवाददाता / मुंबई
पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल द्वारा बरती गई लापरवाही और लालच के चक्कर में गर्भवती महिला की जान चली गई। इस घटना ने राज्य में चल रहे सभी चैरिटी अस्पतालों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठा दिए हैं। दूसरी तरफ लाडली बहन की तड़पते हुए दर्दनाक तरीके से हुई मौत के बाद सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अचानक नींद टूटी और उन्होंने अस्पताल के खिलाफ न केवल पुणे के धर्मदाय सह आयुक्त की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने के आदेश दिए, बल्कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, बनाई गई चैरिटी अस्पताल योजना का संबंधित अस्पतालों द्वारा अनुपालन न किए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल के कथित मामले की जांच पुणे के धर्मदाय सह आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की जाएगी। इस समिति में उपसचिव, सह कक्ष प्रमुख, कक्ष अधिकारी, धर्मदाय अस्पताल सहायता कक्ष, मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रतिनिधि, मुंबई के जेजे अस्पताल के अधीक्षक और विधि व न्याय विभाग के अवर सचिव इस समिति के सदस्य सचिव होंगे। सीएम के इन निर्देशों में कहा गया है कि चैरिटी अस्पतालों में आरक्षित बेड निर्धन और कमजोर आय वर्ग के मरीजों के लिए उपलब्ध कराए जाएं।