सामना संवाददाता / मुंबई
सरकार सेवा भाव से अस्पताल शुरू करने वालों को बड़ी सहूलियत देती है। लेकिन स्वास्थ्य सेवा को पूरी तरह व्यवसाय बनाने वालों ने डॉक्टरी पेशे को शर्मसार कर दिया है। पुणे की घटना इसका ताजा उदाहरण है। भाजपा विधायक ने भी गरीबों के दुख को बताते हुए सरकार को आईना दिखाया है। विधायक सुरेश धस ने कहा कि अब अस्पतालों के बिल बेकाबू हो चुके हैं। गरीबों को तो बीमार भी नहीं पड़ना चाहिए ऐसा सोचने की नौबत आ गई है। बीमार होने पर बिल की सोचकर वे इलाज नहीं करवाते हैं। ऐसी स्थिति आज बन गई है।
धस ने कहा कि पुणे की घटना में मरीज को इलाज से पहले १० लाख रुपए जमा करने को कहा गया। ये हालात चिंताजनक हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर समिति गठित करने की घोषणा की है पर कुछ दिनों के भीतर क्या कार्रवाई होगी, यह देखना होगा। धस ने कहा कि ६० रुपए की दवाई अगर ग्राहक तक ६,००० रुपए में पहुंच रही है तो गरीब इंसान वैâसे जीएगा? विधायक योगेश सागर जो खुद अस्पताल चलाते हैं, उन्होंने भी मुझे यह बात बताई है। कुछ अस्पतालों के मालिकों की मेडिकल दुकानों से ही दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।