उल्हासनगर
उल्हासनगर में बढ़ती गंदगी के बावजूद भारत स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान वैâसे सफल हो सकता है क्योंकि उल्हासनगर की सफाई व्यवस्था रामभरोसे चल रही है और इसका नजारा मुख्यालय के समीप कचरे से घिरा परिसर देखने को मिलता है। ‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर दिनेश मीरचंदानी ने उल्हासनगर की सफाई की पोल खोली है।
दिनेश मीरचंदानी ने बताया कि उल्हासनगर शहर के मुख्यालय जहां मुख्य अधिकारी रहते हैं, उस मुख्यालय के समीप तमाम तरह की गंदगी देखी जा सकती है। उल्हासनगर मुख्यालय और अग्निशमन विभाग के पीछे पानी की टंकी के समीप समाज मंदिर बनाया गया है। इस समाज मंदिर के सामने कचरे का अंबार लगा हुआ है। इतना ही नहीं, पास में ही स्थित कुत्तों के नसबंदी वेंâद्र में भी सफाई का अभाव है। कुत्तों के नसबंदी वेंâद्र के समीप खाद बनाने का प्रकल्प शुरू किया गया है। उपर्युक्त प्रकल्प से लोगों को कुछ फायदा हो रहा है या उससे कितनी खाद बनाई गई? प्रकल्प लगाने का फायदा किस तरह से हो रहा है, कहा नहीं जा सकता है? उल्हासनगर मनपा मुख्यालय के पीछे की उपर्युक्त जगह पर बढ़ती गंदगी और बदबू से जहां एक तरफ सफाई की पोल खुल गई है, वहीं दूसरी तरफ यह मनपा की योजना पर पानी पेâरता हुआ दिखाई देता है। शहर को कचरा शून्य बनाने के लिए मनपा ने संकल्प लिया है। शहर को कचरा शून्य शहर बनाने का संकल्प अभियान शुरू है, परंतु मनपा मुख्यालय के समीप ही कचरे का ढेर ‘दीपक तले अंधेरा’ वाली कहावत चरितार्थ कर रहा है। उल्हासनगर की पानी की टंकी को कई तरह के रंगों से रंग-रोगन कर आकर्षक बनाया जा रहा है। वहीं मनपा मुख्यालय के समीप पानी की टंकी गंदगी और कचरे से पटी पड़ी है, जिसकी तरफ मनपा प्रशासन के अधिकारियों का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है। गंदगी और बदबू के कारण परिसर के लोगों का जीना हराम हो गया है।