म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद बचाव कार्य जारी है। इस बीच भूकंप की वजह से अब तक १,७०० से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि हजारों की संख्या में लोग घायल हुए हैं। यहां बड़े पैमाने पर ईमारतों को नुकसान पहुंचा है। मरने वालों और घायलों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि कई लोग अभी भी ढही हुई इमारतों के नीचे फंसे हुए हैं।
संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने अनुमान लगाया है कि मरने वालों की संख्या १०,००० से अधिक हो सकती है। भूकंप का केंद्र म्यांमार के मध्य सागाइंग क्षेत्र में स्थित था, जो ऐतिहासिक शहर मांडले के पास है। मांडले में कई इमारतें, पुल और मंदिर नष्ट हो गए हैं या क्षतिग्रस्त हुए हैं।
देश में एक सदी से भी अधिक समय में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप था। हालात ऐसे हैं कि बचाव दल प्रभावित लोगों तक पहुंचने में नाकाम हो रहे हैं। खासतौर पर उन इलाकों में जहां इरावदी नदी पर एक प्रमुख पुल के ढह जाने से संपर्क टूट गया है। माना जा रहा है कि मृतकों की सही संख्या सामने आने में कई सप्ताह लग सकते हैं।
महामारी फैलने का बढ़ा खतरा
म्यांमार में भूकंप के बाद मलबे में दबी लाशों की भीषण दुर्गंध चारों ओर फैल गई है। महामारी फैलने का भी खतरा बढ़ गया है। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है मलबे में दबे लोगों के जीवित मिलने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं। भारत से भी कई टीमें म्यांमार में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने और घायलों के इलाज के लिए पहुंच चुकी हैं।
मलबे से ३ दिन बाद
जिंदा निकली गर्भवती महिला
म्यांमार में भूकंप से ढही इमारतों के अंदर फंसे चार लोगों को घटना के ३ दिन बाद जिंदा बचाया गया, जिनमें एक गर्भवती महिला और एक लड़की भी शामिल है। म्यांमार के सरकारी मीडिया के अनुसार, रविवार तक कम-से-कम १,७०० लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। भारत, चीन और थाईलैंड ने म्यांमार को राहत सामग्री भेजी है।