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बेस्ट प्रशासन की तानाशाही! …बेस्ट कर्मचारियों को कोविड भत्ता देने से इंकार

बीएमसी ने कोविड भत्ते की राशि बेस्ट को की सुपुर्द
संदीप पांडेय / मुंबई
कोरोना जैसी महामारी में मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली बेस्ट ने मुंबईकरों की दिन-रात सेवा की थी। इसके कारण मुंबई के लोगों को बहुत राहत मिली थी। अपनी जान को धोखे में डालकर अत्यावश्यक सेवा देने वाले लोगों को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रतिदिन ३०० रुपए विशेष कोविड भत्ता देने का निर्णय लिया था। यह कोविड भत्ता कोविड कार्यकाल में ३१ दिसंबर २०२० तक काम करनेवाले सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को दिया जाना था।
बेस्ट के कर्मचारियों को जून २०२० तक का कोविड भत्ता समय पर मिल गया था, लेकिन उसके बाद का अभी तक बेस्ट कर्मचारियों को कोविड भत्ता नहीं मिल पाया। बीएमसी में कार्यरत सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को यह भत्ता समय पर ही मिल गया था, लेकिन बेस्ट कर्मचारियों को इतने लंबे समय के बाद भी जून २०२० से दिसंबर २०२० तक का कोविड भत्ता नहीं मिला था, जिसके लिए बेस्ट में कार्यरत सभी यूनियन प्रयत्नशील थीं। आखिरकार मुंबई मनपा ने १९ जून को कोविड भत्ता के रूप में ७८ करोड़ की देय धनराशि बेस्ट को सुपुर्द कर दी, लेकिन बेस्ट उपक्रम अब कोविड भत्ता को देने में असमर्थता जाहिर कर रहा है। बेस्ट उपक्रम का कहना है कि बेस्ट में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को देनेवाली ग्रेच्युटी की रकम अभी तक मनपा से आनी बाकी है, इसलिए जब तक मनपा से १३२ करोड़ रुपए और नहीं आ जाते, तब तक बेस्ट के कर्मचारियों और अधिकारियों को कोविड भत्ता नहीं दिया जा सकता। बेस्ट की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है ये सबको पता है और मनपा अब शायद आगे से आर्थिक मदद भी न दे, जिसके कारण बेस्ट बस का किराया बढ़ाने के लिए सोच रही है। लेकिन कोविड भत्ता का भुगतान मनपा से मिलने के बाद भी उसे कर्मचारियों और अधिकारियों को न देना समझ से परे है।
इस विषय में बेस्ट के संबंधित अधिकारियों से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया। बेस्ट की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण बेस्ट कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने के बाद ग्रेच्युटी की रकम मिलने में दो से तीन साल का समय लग जा रहा है। बहुत से कामगार कामगार न्यायालय से लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट तक का चक्कर लगा रहे हैं, परंतु मनपा और बेस्ट प्रशासन कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

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