मनपा की लापरवाही से बच्चों की हालत खराब
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
‘ईडी’ २.० सरकार की पोल खुल रही है। मायानगरी मुंबई धीरे-धीरे कुपोषण की नगरी बनती जा रही है। इस साल फरवरी तक मुंबई में २०,००० कुपोषित बच्चे मिले हैं। बच्चों में फैल रहे कुपोषण पर केंद्र सरकार की एकीकृत बाल विकास परियोजना के पोषण ट्रैकर ने एक रिपोर्ट जारी की है। इससे जहां मुंबई में कुपोषण की वास्तविक तस्वीर सामने आई है, वहीं मुंबईकरों के स्वास्थ्य पर गंभीरता से ध्यान देने का दावा करनेवाली मुंबई मनपा के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
केंद्र सरकार की वेबसाइट ‘पोषण ट्रैकर’ पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मुंबई में फरवरी में पंजीकृत बच्चों की कुल संख्या ४९,०१९ है, जिनमें से ४३,८९२ बच्चे स्वस्थ हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई शहर में १,०३८ गंभीर और २,९६३ बच्चे मध्यम कुपोषण के शिकार हुए हैं। इसी तरह पूर्व व पश्चिम उपनगर में कुल २,३८,०९४ बच्चों का पंजीकरण हुआ है। इसमें से २,१७,७५२ बच्चे स्वस्थ पाए गए हैं। हालांकि, २,८८७ बच्चे गंभीर और १३,४५७ मध्यम कुपोषित मिले हैं।
मुंबई में गंभीर समस्या
पोषण ट्रैकर रिपोर्ट ने एक बार फिर मुंबई में कुपोषण की गंभीर समस्या को उजागर किया है। आईसीडीएस विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए पहले से ही कदम उठाए जा रहे हैं।
आयुक्त का कहना है
आईसीडीएस आयुक्त कैलाश पगारे ने बताया कि मुंबई में बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। अपर्याप्त सुविधाएं, खराब स्वास्थ्य और पोषण संकेतकों के कारण बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। कुपोषण को कम करने के लिए ६ महीने से ३ साल तक के बच्चों की माताओं को नियमित पोषण आहार दिया जाता है, जबकि ३ से ६ साल के बच्चों को गर्म ताजा भोजन उपलब्ध कराया जाता है। फिलहाल, कुपोषण पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं।