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संपादकीय : भाजपाकृत मुसलमानों की खुशामद

वक्फ संशोधन विधेयक को सरकार ने मंजूर करवा लिया। लोकसभा में विधेयक के पक्ष में २८८ और विपक्ष में २३२ वोट पड़े। बहुमत का आंकड़ा २७३ है इसलिए सरकार बड़े अंतर से जीत सकी ऐसा नहीं है। सरकार की हर कोशिश के बावजूद उनका बहुमत का आंकड़ा ३०० के पार नहीं पहुंच पा रहा है। नीतीश कुमार पूरी तरह बहरेपन की स्थिति में पहुंच गए हैं और चंद्राबाबू को केंद्र से भरपूर फंड मिल रहा है इसलिए सरकार टिकी हुई है। लोकसभा में २३२ विरोधियों की एकजुटता सरकार के लिए चिंताजनक है। गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि वक्फ संशोधन विधेयक मुसलमानों के फायदे के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल मुसलमानों का तुष्टीकरण कर रहे हैं और इससे समाज में विभाजन पैदा होगा। जिन लोगों ने लोकसभा में अमित शाह का भाषण सुना है उन्हें ही समझ आएगा कि इस वक्त मुसलमानों की जी हजूरी कौन कर रहा है? शाह का पूरा भाषण इस आशय का था कि, ‘अब हम मुसलमानों के एकमात्र मसीहा हैं। हमने कांग्रेस, मुस्लिम लीग की जगह ले ली है।’ मोदी-शाह को आज मुसलमानों की चिंता है और वे कहते हैं कि हम मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा करेंगे और बदले में उनकी नजर वक्फ बोर्ड के कब्जे वाली ढाई लाख करोड़ की संपत्ति पर है। उनका कहना है कि वे इस संपत्ति की रक्षा करेंगे। इसका सही मतलब क्या है? शाह ने कहा, सरकार २०२५ तक किसी भी मस्जिद, दरगाह, मदरसे आदि को हाथ नहीं लगाएगी, लेकिन जो खाली जमीनें हैं उन्हें बेचकर वह पैसा गरीब मुस्लिम महिलाओं में बांटेगी तो आखिरकार सच उसके मुंह से बाहर आ ही गया।
खरीदने और बेचने की बात
आ ही गई। जमीनें बेच देंगे, ऐसा उन्होंने कहा। अब ये व्यापारी जमीन किसे बेचेंगे? इसका जवाब जनता को चाहिए। देश में बेचने-खरीदने वाले दो-चार लोग हैं। व्यापार मंडल की नीति है कि ५०० करोड़ लूटना है तो उस लूट का ५ -१० करोड़ गरीबों के मुंह पर मारा जाए। वक्फ बोर्ड का सारा खेल हिंदुत्व, गरीब मुसलमानों को न्याय दिलाने के लिए नहीं, बल्कि वक्फ बोर्ड की खाली जमीनों के लिए चल रहा है। वक्फ बोर्ड की संपत्ति की रक्षा करनेवालों ने देश की संपत्ति को अपने चहेते उद्योगपतियों को बेच दिया। एयरपोर्ट से लेकर धारावी तक सबकुछ बेचने के बाद अब वे वक्फ मंडल की जमीनों से धंधा करने निकले हैं। मोदी सरकार कह रही है कि उसने वक्फ जमीन का मुद्दा देशहित में उठाया है, लेकिन चीन ने लद्दाख में घुसकर उसकी ४० हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया है, इस पर क्या कहना है? पहले उस जमीन की चिंता करें। कश्मीर घाटी में ‘पंडित’ मंडली की अभी तक घर वापसी नहीं हुई है, उन्हें अपनी जमीन और घर नहीं मिल रहे। उन हिंदू पंडितों की चिंता करें, लेकिन हिंदू समाज की चिंता न करके ये लोग मुस्लिम जी हुजूरी का रास्ता अपना चुके हैं और दूसरों को हिंदुत्व आदि का पाठ पढ़ा रहे हैं। सारा मामला लाखों करोड़ों की संपत्ति का है और ये कानून बदलकर उस संपत्ति को बेचने की चाल है। वक्फ बोर्ड में अब दो गैर मुस्लिम होंगे, लेकिन गृह मंत्री का कहना है कि ऐसा नहीं होगा तो क्या
हिंदू मंदिरों के बोर्ड में भी
दो-चार गैर-हिंदू होंगे? मुंबई में मराठियों की जमीनें मुसलमानों द्वारा नहीं, बल्कि अलग ही गैर-हिंदुओं द्वारा हड़पी जा रही हैं और ये लोग भाजपा को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। ये लोग निर्माण क्षेत्र में हैं और मांस-मछली खाने वाले हिंदुओं को अपने गृह संकुल में जगह नहीं देते हैं। क्या यह हिंदुओं के अधिकारों पर हमला नहीं है? पूरे देश को शाकाहारी बनाना और साथ ही जमीन और पैसा लूट कर खाना यह एक अमानवीय नीति है। अगर वक्फ भूमि की बिरयानी भी उनके गालों में फंस जाए तो वे इसे अल्लाह का प्रसाद समझकर स्वीकार करेंगे और बाहर आकर हिंदुत्व के मंजीरें बजाएंगे। वक्फ बोर्ड की संपत्ति दानधर्म के जरिए जमा हुई है। लोग अल्लाह के नाम पर दान देते हैं और यह संपत्ति अनंत काल से जमा होती आ रही है। अब ये सभी संपत्तियां ‘डिजिटली रिकॉर्ड’ की जाएंगी। नए कानून में और भी कई चीजें शामिल हैं। इस तरह के संशोधन किसी भी नए विधेयक में किए जाते हैं, लेकिन इस वक्फ संपत्ति विधेयक को संसद में पेश करने के लिए चुना गया मुहूर्त दिलचस्प है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत पर थोपे गए २६ फीसदी आयात शुल्क से जनता का ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार ने वक्फ संपत्ति विधेयक पेश किया। प्रेसिडेंट ट्रंप द्वारा लादे गए आयात शुल्क का असर भारतीय उद्योग जगत पर पड़ा है। शेयर बाजार और रुपया ढह गया। इससे महंगाई और बेरोजगारी की समस्या पैदा होगी इसलिए यह विधेयक लाकर मोदी सरकार ने अपना पसंदीदा हिंदू-मुस्लिम खेल शुरू कर दिया है। वक्फ संपत्ति विधेयक हिंदुओं की आंखों में धूल झोंकने और वोट के लिए मुसलमानों की खुशामदी है। यह भ्रष्टाचार को कानूनी मुल्लमा पहनाने का धार्मिक खेल है।

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