फडणवीस, शिंदे और अजीत पवार की तिकड़ी ने महाराष्ट्र में फिल्म ‘गोलमाल’ रिलीज की है। महाराष्ट्र की आठ करोड़ जनता को इन तीनों ने अज्ञानी बना दिया है। इन तीनों ने विधानसभा चुनाव से पहले किए गए सभी वादों पर पानी फेर दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान शिंदे-फडणवीस ने एलान किया था कि वे लाडली बहनों को २,१०० रुपए प्रतिमाह देंगे। किसानों का ३ लाख तक का कर्ज माफ करेंगे। इन्हीं घोषणाओं के कारण बहनों-भाइयों ने वोट किया। लाडले बेरोजगार भाइयों से यह भी वादा किया था कि हर महीने खाते में चार हजार रुपए जमा करेंगे। लेकिन सत्ता में आने के बाद ‘अभी यह संभव नहीं है। सही समय पर देखते हैं,’ ऐसा इन तीनों ने कह दिया। ये तीनों बंडलबाज इन वादों पर हाथ खड़े कर महाराष्ट्र में घूम रहे हैं। महिलाओं को २,१०० रुपए देना बस में नहीं। भाजपा मंत्री ने कह डाला कि महाराष्ट्र पर कर्ज का पहाड़ है। सरकारी पैसे से बहनों से वोट खरीदे और अब इन ‘बंडलबाज’ भाइयों ने उन्हें धोखा दिया है।’ किसानों की कर्जमाफी को लेकर भी यही धोखाधड़ी हुई। इसके विपरीत अजीत पवार ने किसानों को आड़े हाथ लिया है। ‘३१ मार्च से पहले लोन की किस्त चुकाएं, बकाया चुकाएं। अन्यथा जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।’ उन्होंने चेतावनी दी है। किसानों ने अजीत पवार से पूछा, ‘दादा, आप ऐसा वैâसे कहते हैं? आप लोगों ने कर्जमाफी का वादा किया था तो अब वादे से मुकर क्यों रहे हैं?’ इस पर ये सज्जन कहते हैं, ‘अरे पगले, क्या तूने कभी मेरे भाषण में कर्जमाफी के बारे में सुना है? तुम्हें पता है, चादर देखकर हाथ और पैर पैâलाने चाहिए।’ अजीत पवार का वह बयान धक्कादायक है। फडणवीस-शिंदे ने किसानों से कर्जमाफी का वादा किया था। भाजपा के घोषणापत्र में
किसानों की कर्जमाफी
की बात कही गई है। पवार इसी सरकार के वित्त मंत्री और उप मुख्यमंत्री हैं। अजीत पवार की सरकार भी अलग नहीं है। वे जिम्मेदारी से वैâसे पल्ला झाड़ सकते हैं? जब ये वादे किए गए थे तब राज्य में इन्हीं तीन बंडलबाजों की सरकार थी। जब शिंदे-फडणवीस कर्जमाफी की लफ्फाजी कर रहे थे तब अजीत पवार ने उन्हें रोका भी नहीं और न ही चेतावनी दी कि ये संभव नहीं होगा। फडणवीस हर भाषण में कहते थे कि वे किसानों का सातबारा कोरा करेंगे और उन्हें चिंतामुक्त करेंगे; लेकिन फडणवीस ने शिंदे, अजीत पवार, पटेल की ईडी, सीबीआई के सातबारा को कोरा कर चिंतामुक्त कर दिया। पटेल, अजीत पवार की सैकड़ों करोड़ की संपत्ति ईडी ने जब्त की। इस मंडली ने उसे छुड़ा लिया। किसान जिंदा रहे या मरे वे खुद ही देख लेंगे। फिर इन तीन बंडलबाजों के बीच कोई तालमेल नहीं है। अजीत पवार कहते हैं, बकाया कर्ज चुकाओ। दूसरी ओर शिंदे कहते हैं, ‘लाडली बहनों और कर्जदार किसानों, चिंता मत करो ये लाडला भाई सारे वादे पूरे किए बिना नहीं रहेगा’, वहीं तीसरा गोलमोल जवाब देकर निकल लेता है। ये बंडलबाज सरकार यहीं नहीं रुकी। सभी सरकारी विभागों को सीधे आदेश दिए गए हैं कि ‘खर्च पर नियंत्रण रखें और मुफ्त सब्सिडी वाली योजनाएं बंद करें।’ राज्य के मुख्य सचिव का यह सर्वुâलर यानी बंडलबाज तिकड़ी द्वारा जनता के साथ की गई धोखाधड़ी पर ‘सरकारी’ मुहर है! धोखाधड़ी के लिए इन तीनों के खिलाफ धारा ४२० के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। लोगों को धोखा देकर वोट ले लिए गए और अब वे जनता के सामने जाने को तैयार नहीं हैं। इन बंडलबाजों के महागुरु श्री. मोदी ने उद्योगपतियों और अमीरों का करीब साढ़े नौ लाख करोड़ का कर्ज माफ किया। इसमें अनिल अंबानी, जिंदल जैसे उद्योगपति हैं; लेकिन आम किसानों का कर्ज माफ नहीं करते। महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी पार्टियों को तोड़कर
विधायक और सांसद खरीदने के लिए
तीन हजार करोड़ खर्च हुए; लेकिन जब किसानों की कर्जमाफी की बात आई तो वे भाग खड़े हुए। इस गोलमाल को क्या कहें? महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्याएं बढ़ी हैं। जब से तीन बंडलबाजों की सरकार सत्ता में आई है तब से हजारों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इन किसानों के परिवार निराश्रित हो गए। उनकी चीखें इस बहरी सरकार के कानों को सुनाई नहीं पड़तीं। यदि कोई दरवाजे पर कर्ज का सवाल लेकर खड़ा हो ही जाता है तो, ‘औरंगजेब को याद करो, सारी चिंताएं भूल जाओगे। घर में फावड़े-कुदाल तो जरूर होंगे। उसे लो और कब्र खोदने की बेरोजगार गारंटी पर जाओ। यहां हिंदुत्व खतरे में है और तुझे कर्जमाफी की सूझ रही हैं?’, ऐसा कहकर किसानों को ही पागल बनाया जा रहा है। भले ही लोगों को जाति और धर्म के नशे में गुम कर दिया जाए, लेकिन अंतत: बुझे हुए चूल्हे एक दिन बगावत कर ही देंगे। इन बंडलबाज सरकार ने बगावत करने वाले किसानों को देशद्रोही ठहराकर मारने की भी व्यवस्था कर ली है। राज्य की लाडली बहनें, लाडले भाई, लाडले किसान बंडलबाज हुक्मरानों की धोखाधड़ी से टूट गए हैं। इन बंडलबाजों को अब एहसास हुआ कि महाराष्ट्र पर कर्ज का पहाड़ है। अब उन्हें लगता है कि इस मुफ्तखोरी से राज्य में आर्थिक अराजकता पैâल जाएगी, तो क्या कर्जमाफी का वादा करते वक्त उन्होंने भांग चढ़ा ली थी? अजीत पवार कहते हैं, ‘चादर देखकर पैर पैâलाओ।’ किसानों के पास न चादर है और न पैरों में ताकत। वह गिर पडा़ है। तीनों बंडलबाज और उनके भ्रष्ट गैंग के पैर और चादर भी बड़े हैं। पैर पैâलाने पर भी चादर कम नहीं होती। भ्रष्टाचारियों को कभी किसी चीज की कमी नहीं होती। लेकिन मेहनतकशों पर जहर खाकर मरने का समय आ जाता है। तीन बंडलबाजों ने महाराष्ट्र के किसानों पर वो वक्त ला दिया है, लेकिन इन किसानों के पास जहर खाने के लिए पैसे नहीं हैं। बंडलबाज सरकार किसानों को जहर की बोतल खरीदने के लिए सौ रुपए का कर्ज तो दे!