अतिरिक्त बजट की मंजूरी के बिना जीआर जारी करना सभागृह के विशेषाधिकार का है हनन
सामना संवाददाता / मुंबई
वित्तमंत्री ने गत शुक्रवार को विधानमंडल में अतिरिक्त बजट पेश किया। इस बजट को पेश करने के बाद विधायिका को यह अधिकार होता है कि वह इसके पक्ष और विपक्ष पर चर्चा कर इस बजट को मंजूरी दे सके। इसके बाद विनियोग विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल जाती है। इसके बाद बजट में धनराशि खर्च करने की मंजूरी दी जाती है, फिर बजट को खर्च करने का अधिकार सरकार को मिल जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया को दरकिनार कर मुख्यमंत्री ने वैâबिनेट की बैठक लेकर मुख्यमंत्री माझी लाडकी योजना का जीआर जारी कर दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि यह संप्रभु सदन के अधिकारों का उल्लंघन है। विशेषाधिकार हनन उल्लंघन के संदर्भ में विपक्ष के नेता ने मीडिया से बातचीत करते हुए उक्त बातें कहीं।
वडेट्टीवार ने कहा कि इस सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी योजना का जीआर निकालकर महिलाओं के साथ धोखा किया है, क्योंकि बजट अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ है उसके पहले जीआर निकाला जाता है। यह महायुति में चल रहे आपसी विवादों और राजनीति के कारण जल्दबाजी में लिया गया सरकारी निर्णय है। वडेट्टीवार ने अध्यक्ष को कानूनी प्रक्रिया को पढ़कर सुनाया। उन्होंने इस संदर्भ में कानूनी प्रक्रिया की जांच करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह गलती इसलिए की है क्योंकि वह इस घोषणा का श्रेय वित्तमंत्री को नहीं देना चाहते हैं। भाई-बहन के रिश्ते पर महायुति के एक मंत्री का गंदा बयान महायुति को महंगा पड़ा है इसलिए महायुति सरकार ने महिलाओं के लिए एक योजना की घोषणा कर प्रायश्चित करने की कोशिश की है। प्रदेश में महिलाओं पर अन्याय और अत्याचार बढ़ा है। यह मुख्यमंत्री उन गरीब महिलाओं के लिए प्रायश्चित करने के प्रयास के रूप में माझी लाडकी योजना लेकर आए हैं।
जब पत्रकारों ने राज्य के उत्पाद शुल्क मंत्री के बयान पर सवाल उठाया तो वडेट्टीवार ने कहा कि उनकी पढ़ाई कच्ची है। उन्हें शायद पता नहीं होगा कि बजट की मंजूरी के बिना जीआर नहीं निकाला जा सकता।