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जरूरी है आजादी

जरूरी नहीं है कि इंसान जैसा दिखता है वैसा ही हो। ‘अर्जुन रेड्डी’, ‘जयेशभाई जोरदार’, ‘महाराज’, ‘डब्बा कार्टेल’ जैसी फिल्मों और वेब शो में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुकीं शालिनी पांडे भले ही अपने किरदारों में डरी-सहमी नजर आती हों, लेकिन असल जिंदगी में वो वैसी नहीं हैं, जैसा फिल्मों में दिखती हैं। असल जिंदगी में अपनी बातों को बड़ी ही बेबाकी से कहनेवाली शालिनी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब भी मुझे कुछ गलत लगता है, मैं पलटकर उस पर सवाल करती हूं। अपने आसपास के लोगों सहित बेजुबानों के लिए लड़नेवाली शालिनी ने कहा कि मैं बहुत मुंहफट इंसान हूं। हां, यह अलग बात है कि फिल्मों में मुझे ऐसी महिलाओं के किरदार ज्यादा मिले, जो अपनी आवाज बुलंद करने की बजाय डरी-सहमी सी रहने के साथ अपनी आवाज नहीं उठा सकती थीं। बचपन से ही बिना किसी झिझक के अपनी बातों को बेबाकी से रखनेवाली शालिनी ने कहा कि डरना मेरी फितरत में नहीं है क्योंकि मुझे मेरा उद्देश्य पता है और मेरे लिए मेरी आजादी जरूरी है।

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