सामना संवाददाता / कुर्नूल, आंध्रप्रदेश
परम पूज्य आचार्य श्री विजय केसरसूरीश्वर म.सा.समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति परम पूज्य आचार्य श्री विजय विज्ञानप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. और उनके दो शिष्यों का रविवार को सुबह 9 बजे के करीब करनुल राजमार्ग पर कुर्नूल से करीब 60 किलोमीटर दूर ट्रक से एक्सीडेंट हो गया। ड्राइवर ट्रक छोड़कर भाग गया।गच्छाधिपति व मुनिराज प्रियंकर विजयजी को इलाज के लिए हैदराबाद भेजा गया।
पूज्य आचार्य भगवंत एवं एक मुनिवर को कुर्नूल की हॉस्पिटल एडमिट किया गया तथा एक शिष्य पंन्यास प्रवर श्री पुनितप्रभ विजयजी की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। दोनों गुरु भगवंतों का सिटीस्केन हुआ हैं। डॉक्टरों की पूरी टीम लगी हुई।
गिरिविहार संस्था के ट्रस्टी कुर्नूल पहुंच गए हैं तथा कुर्नूल श्रीसंघ के अनेक ट्रस्टी व स्वयंसेवक वहां मौजूद हैं। आचार्य भगवंत अभी आंखें नहीं खोल रहे हैं, उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है और वो बोल भी नहीं पा रहे है। उनके शीघ्र स्वास्थ्य की कामना-प्रार्थना जैन संघ कर रहा है।
साथ में मुनिवर प्रियंकर विजयजी अभी बेहोश हैं व उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी स्थिति अभी गंभीर है। गुरुदेव के साथ विहार कर रहे दीक्षार्थी हिरेनभाई व व्हील चेयर चालक की भी घटनास्थल पर मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, पंन्यास श्री पुनितप्रभ विजयजी महाराज और दीक्षार्थी हिरेनभाई का पार्थिव देह भी एक्सीडेंट स्थल से हैदराबाद ले जाया जा रहा है। कल उन दोनों का हैदराबाद में अग्निसंस्कार होगा तथा व्हील चेयर वाले भाई का पार्थिव देह उनके गृहनगर पालीताना रवाना किया जा रहा है।
कुर्नूल श्रीसंघ ने इस पूरे घटनाक्रम में बहुत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी भूमिका निभाई है और श्रीसंघ ने परिस्थितियों को देखते हुए पंन्यासजी महाराज का अग्निसंस्कार कुर्नूल में करने की भावना भी छोड़कर शांति, भक्ति और सौहार्द का परिचय दिया है। हैदराबाद में प्रभु शासन के क्रांतिवीर श्रमण मुनि श्री गुणहंसविजयजी महाराज अंतिम विधि करवाएंगे और अस्वस्थ भगवंतों की सेवा-सुश्रुसा का दायित्व निभाएंगे।
प्रवर समिति के कार्यवाहक गच्छाधिपति आचार्य श्री अभयदेव सूरीश्वरजी म.सा., गच्छाधिपति आचार्य श्री विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी म.सा., गच्छाधिपति आचार्य कुलचंद्र सूरीश्वरजी (के सी) म.सा.आदि ने इस तरह की घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय जैन संघ विहार के समय सभी एतिहात बरतें तथा सभी आचार्य भगवंत एवं मुनिवर के होश में आने और शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना, अभिषेक, आयंबिल तप और मंत्रजाप करने की अपील जैन संघों ने की है।