उमेश गुप्ता / वाराणसी
चैत्र नवरात्रि की पंचमी से सप्तमी तक चलने वाले श्री श्री १००८ बाबा महाश्मसान नाथ जी का त्रिदिवसीय श्रृंगार महोत्सव शुक्रवार को समापन हुआ। इस अवसर पर बाबा का सायंकाल पंचमकार का भोग लगाकर तांत्रोकत विधान से भव्य आरती की गई। इस तरह की मान्यता है कि बाबा को प्रसन्न करने के लिए शक्ति ने योगिनी रूप धरा था और आज बाबा का प्रांगण रजनी गंधा, गुलाब व अन्य सुगंधित फूलों से सजाया गया था। आरती के पश्चात नगर वधुओं ने अपने गायन व नृत्य के माध्यम से परंपरागत भावांजलि बाबा को समर्पित करते हुए मन्नत मांगी कि बाबा अगला जन्म सुधारें। यह बहुत ही भावपूर्ण दृश्य था, जिसे देखकर सभी लोगों की आंखें डबडबा गईं।
इस श्रृंगार महोत्सव के प्रारंभ के बारे में विस्तार से बताते हुए आयोजकों ने कहा कि यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चला आ रही है, जिसमें यह कहा जाता है कि राजा मानसिंह द्वारा जब बाबा महाश्मशान नाथ के इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। तब मंदिर में संगीत के लिए कोई भी कलाकार आने को तैयार नहीं हुआ था। इसी कार्य को पूर्ण करने के लिए जब कोई तैयार नहीं हुआ तो राजा मानसिंह काफी दुःखी हुए और यह संदेश उस जमाने में धीरे-धीरे पूरे नगर में फैलते हुए काशी के नगर वधुओं तक भी जा पहुंचा, तब नगर वधुओं ने डरते-डरते अपना यह संदेश राजा मानसिंह तक भिजवाया कि यह मौका अगर उन्हें मिलता है तो काशी की सभी नगर वधुएं अपने आराध्य संगीत के जनक नटराज महाश्मशानेश्वर को अपनी भावांजलि प्रस्तुत कर सकती है। यह संदेश पा कर राजा मानसिंह काफी प्रसन्न हुए और ससम्मान नगर वधुओं को आमंत्रित किया गया और तब से यह परम्परा चल निकली, वही दूसरे तरफ नगर वधुओं के मन मे यह आया की अगर वह इस परम्परा को निरन्तर बढ़ाती हैं तो उनके इस नरकीय जीवन से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। फिर क्या था आज सैकड़ों वर्ष बीतने के बाद भी यह परम्परा जीवित है और बिना बुलाए यह नगर वधुएं कहीं भी रहें चैत्र नवरात्रि के सप्तमी को यह काशी के मणिकर्णिका घाट स्वयं आ जाती है।
तत्पश्चात बाबा का रात्रि पर्यंत चलने वाला जागरण प्रारंभ हुआ, जो कि जलती चिताओं के पास मंदिर में अपने परंपरागत स्थान से प्रारंभ हुआ, इसमें सर्वप्रथम आए हुए अतिथियों का स्वागत मंदिर के अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता, गुलशन कपूर एवं जंत्रलेश्वर यादव ने किया।
बाबा का भजन-दुर्गा दुर्गति नाशिनी, दिमिग दिमिग डमरू कर बाजे, डिम डिम तन दिन दिन, तू ही तू जगबक आधार तू ओम नमः शिवाय, मणिकर्णिका स्रोत, खेले मसाने में होरी के बाद दादरा, ठुमरी व चैती गाकर बाबा के श्री चरणों में अपनी गीतांजलि अर्पित की गई। इनके बाद काशी का प्रसिद्ध सुमधुर गायन औम मंगलम औमकार मंगलम, बम लहरी बम बम लहरी जैसे भजनों से भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
उक्त आयोजन में महामंत्री बिहारी लाल गुप्ता, महंत संजय झींगरन, विजय शंकर पांडे, दिलीप यादव, संजय गुप्ता, दीपक तिवारी, अजय गुप्ता, रिंकू पांडेय, मनोज शर्मा आदि पदाधिकारी व भक्त शामिल थे।