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‘महायुति’ सरकार का विकास पर ब्रेक! …नई परियोजनाओं के लिए नहीं है पैसा

– हजारों ठेकेदारों का बाकी है रु. ९० हजार करोड़
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ‘महायुति’ सरकार कई विकास परियोजनाओं पर काफी खर्च कर रही है। काम ज्यादा और फंड कम है। इसके चलते इन कामों को कर रहे हजारों ठेकेदारों का ९० हजार करोड़ रुपए से अधिक बकाया हो गया है, जिसका भुगतान करने में यह सरकार कोताही कर रही है। इसमें सर्वाधिक बकाया ४५ हजार करोड़ केवल पीडब्ल्यूडी विभाग पर है। इस बीच विभाग ने भी माना है कि तय बजट से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी देने से सड़क निर्माण कार्यों के बिल भुगतान में देरी हो रही है। इसके परिणामस्वरूप परियोजना के पूरे होने में देरी के कारण लागत बढ़ रही है। इतना ही नहीं, कार्यों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इससे सरकार की अब आंख खुल गई है और नए कार्यों को सीमित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग के माध्यम से नए मंजूर कार्यों के संबंध में विशिष्ट नीति बनाना और उनकी संख्या सीमित करना आवश्यक है।

एक साल से ठेकेदार मांग रहे हैं बकाये का भुगतान!

राज्य में कई विकास परियोजनाएं लटक गई हैं। सरकार के पास ठेकेदारों को देने के लिए पैसे नहीं हैं। करीब एक साल से राज्य के विभिन्न ठेकेदार संगठन सड़क, पुल आदि के निर्माण कार्यों के बकाए के भुगतान की मांग उठा रहे हैं। ठेकेदारों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी पर उनका ४६,००० करोड़, जबकि कुल बकाया करीब ९०,००० करोड़ रुपए है। इसके बाद बकाए के भुगतान को लेकर सरकार के खिलाफ ठेकेदारों के संगठनों ने राज्य में चल रहे सभी निर्माण कार्यों को रोककर हड़ताल भी की थी।
दो दिन पहले राज्य सरकार के महायुति सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग ने यह माना कि मिले कुल बजट से अधिक लागत वाले कार्यों को मंजूरी दी गई है इसलिए सरकार द्वारा प्राप्त बजट से उक्त कार्यों के बिलों का भुगतान करना असंभव है।
होगा तकनीकी सत्यापन
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि अत्यधिक वाहनों के आवागमन वाले और तत्काल सुधार की आवश्यकता वाले राज्य के महामार्गों और प्रमुख जिला सड़कों के बीच संचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण कार्य की जरूरत है। सड़क विकास योजना की अनुसूची के अधीन किए जाएंगे। संबंधित कार्यकारी अभियंता, वरिष्ठ अभियंता, मुख्य अभियंता परियोजना की आवश्यकता, व्यवहार्यता, फंड की उपलब्धता, भूमि की उपलब्धता, आवश्यक परमिट आदि के अनुसार एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगे और तकनीकी सत्यापन के बाद इसे सरकार को सौंपेंगे।
काम में दोहराव न हो
सरकार की ओर से कहा गया है कि महामार्गों और मुख्य जिला सड़कों पर काम करते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि काम का कोई दोहराव न हो। इस संबंध में कार्यकारी अभियंता और अधीक्षक अभियंता से प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त सावधानी बरती जाएगी कि काम आधे-अधूरे में न किया जाए। बजट में अधिकतम संख्या में काम शामिल करने के लिए सिविल कार्यों की लागत कम दिखाई जाती है और बाद में संशोधित सरकारी अनुमोदन दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं। इसे रोकने की जरूरत है।

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