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ट्रैक पर नहीं, वादों पर दौड़ रही मेट्रो! …कब पूरा होगा घंटों का सफर, मिनटों में पूरा करने का सपना?

– धीमे निर्माण कार्य से मुंबईकर परेशान
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई जैसे महानगर में मेट्रो नेटवर्क शहर की जीवनरेखा बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति और बार-बार डेडलाइन टलने से यात्रियों की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए)द्वारा तैयार किया जा रहा यह ३३७ किलोमीटर लंबा नेटवर्क कई वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिसमें अब तक सिर्फ चार लाइनें ही चालू हो पाई हैं। शेष लाइनें अभी भी निर्माणाधीन हैं या सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।
इन परियोजनाओं में सबसे बड़ी समस्या समयसीमा की अनदेखी और लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। कई रूट्स जैसे ग्रीन लाइन ४, रेड लाइन ७ए, पिंक लाइन ६ आदि पहले ही तय समय से सालों पीछे चल रहे हैं। इससे न केवल यात्री सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्याएं भी बढ़ी हैं। जगह-जगह लगे बैरिकेड्स और अधूरे निर्माण कार्यों ने मुख्य सड़कों को जाम का अड्डा बना दिया है। एमएमआरडीए की लापरवाही सिर्फ निर्माण में देरी तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना निर्माण और समन्वय की कमी भी इसका बड़ा कारण है। एक ही सड़क पर बार-बार खुदाई, समांतर एजेंसियों में संवादहीनता और अधूरी तैयारियों के चलते विकास कार्य अव्यवस्थित हो गए हैं। कई प्रोजेक्ट्स की लागत लगभग दोगुनी हो चुकी है, फिर भी समय पर पूर्णता की कोई गारंटी नहीं है।
जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तब तक मेट्रो परियोजना आम जनता के लिए एक अधूरा सपना ही बनी रहेगी। मुंबई की जनता बेहतर सुविधा की हकदार है, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता उसे केवल आश्वासन ही रही है।

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