-हसीना के एक लाख कार्यकर्ता भागे
सामना संवाददाता / मुंबई
पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को तो मोदी सरकार ने शरण दे दी है, पर वहां से होनेवाली बांग्लादेशियों की घुसपैठ को रोक पाने में असफल साबित हुई है। अब बांग्लादेश में यूनुस सरकार के सूचना सलाहकार महफूज आलम ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि आवामी लीग के एक लाख समर्थक हिंदुस्थान में घुसपैठ कर चुके हैं। अगर आलम का दावा सही है तो कहा जा सकता है कि बांग्लादेशी आवामी लीग हिंदुस्थान में आ चुकी है।
बता दें कि चीन को लुभाने की कोशिश करनेवाले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सूचना सलाहकार महफूज आलम का दावा हिंदुस्थान के लिए खतरे की घंटी है। बांग्लादेश में पाकिस्तानी कट्टरपंथी ताकतें सक्रिय हो चुकी हैं और वहां से आतंकवादी भी भारत में आ सकते हैं।
लापता बांग्लादेशियों के परिवार हिंदुस्थान में!
-यूनुस सरकार का दावा
हाल के दिनों में कई मीडिया रिपोर्ट आई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि हसीना सरकार का तख्ता पलट होने के बाद बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों ने हिंदुस्थान में घुसपैठ की है। बांग्लादेशी मीडिया से आनेवाली खबरों के अनुसार, अंतरिम सरकार के सूचना सलाहकार महफूज आलम ने ईद के अवसर पर आयोजित एक समारोह में आवामी लीग को लेकर एक लाख आवामी लीग समर्थकों के हिंदुस्थान में घुसने का दावा किया है। आलम के अनुसार, तख्ता पलट के बाद शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान कथित रूप से लापता या मारे गए व्यक्तियों के काफी परिवार भी हिंदुस्थान चले गए हैं।
इस संबंध में कहा गया कि मानवाधिकार समूह ‘मेयर डाक’ ने शहर के तेजगांव क्षेत्र में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। उक्त कार्यक्रम के अनुसार, हसीना की आलोचना करते हुए महफूज आलम ने कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता की हत्या का बदला लेने के लिए लोगों को जबरन गायब कर दिया और उनकी हत्या करवा दी।
शरण देने का आरोप
आलम ने कहा, ‘यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि भारत ने शेख हसीना और उनके आतंकवादी बलों को अपने देश में शरण देने का ऑप्शन चुना है। हमें यह बात पता चली है कि एक लाख से ज्यादा आवामी लीग के सदस्यों ने भारत में पलायन कर लिया है और भारत ने उन सबको अपने यहां शरण दी है।’ महफूज आलम के अनुसार बांग्लादेशियों ने घुसपैठ नहीं की है बल्कि हिंदुस्थान ने अन्हें शरण दिया है।
हसीना पर लगाए गंभीर आरोप
बांग्लादेश सरकार के सूचना सलाहकार महफूज आलम ने इस दौरान शेख हसीना पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘साल २०१३ और २०१४ में जब लोग अपने मतदान के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहे थे, उसी वक्त सबसे ज्यादा लोगों को जबरन गायब किया गया और उनके इस कदम के पीछे का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश की चुनाव व्यवस्था को पूरी तरह से बर्बाद करना था।’