सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे द्वारा 19 जून 1966 को स्थापित की गई शिवसेना को नारायण राणे, छगन भुजबल और एकनाथ शिंदे समझ ही नहीं पाए। केवल सत्ता और अपने स्वार्थ के लिए उन्होंने शिवसेना छोड़ी, ऐसा तीखा आरोप शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उपनेता विश्वनाथ नेरुरकर ने लगाया।
शिवसेना शाखा क्रमांक 14 के शाखाप्रमुख अशोक परब ने अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण अपने पद से इस्तीफा दिया। उनके स्थान पर उपशाखाप्रमुख अभिलाष कोंडविलकर की नियुक्ति की गई। इस अवसर पर कांदिवली स्थित ठाकूर संकुल के कमांडर दत्ताजी सालवी मार्ग पर शिवसेना शाखा 14 की उपशाखा संस्कृति की ओर से महाराष्ट्र यातायात सेना के पदाधिकारी शाम सालवी और शिवसेना पदाधिकारी अमित मोरे द्वारा अशोक परब का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शिवसेना उपनेता विनोद घोसालकर, उपनेता विश्वनाथ नेरुरकर, पूर्व विधायक विलास पोतनीस सहित शुभदा शिंदे, चेतन कदम, नंदकुमार मोरे, अभिलाष कोंडविलकर, रेखाताई बोऱ्हाडे, रोहिणी चौगुले, शशिकांत झोरे, संजय जोजन, भाविका नवलू, वसंत तांबे, तुकाराम जोशी, अशोक म्हामूणकर आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।
इस मौके पर बोलते हुए विनोद घोसालकर और विश्वनाथ नेरुरकर ने कहा कि शिवसेना एक परिवार है और उसी भावना से कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पद कोई भी हो, शिवसैनिक होने का महत्व सबसे बड़ा है और पूर्व पदाधिकारियों को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।
जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक योगेश वसंत त्रिवेदी ने कहा कि पद पर रहते हुए कई बार सम्मान किया जाता है, लेकिन पद छोड़ने के बाद सम्मान मिलना व्यक्ति के काम की असली पहचान होती है। शाम सालवी और उनके साथियों ने यह आयोजन कर अशोक परब के कार्य को सराहा है। इस अवसर पर शाम कदम ने भी अशोक परब के योगदान की सराहना की।