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मानखुर्द में जलसंकट से जूझ रहे लोग! …नल कलेक्शन होने के बावजूद टैंकर की पड़ रही है जरूरत

– सिर्फ कागजों तक सीमित है ‘जल नीति’!
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में मनपा की सभी के लिए जल (डब्ल्यूएफए) नीति के बावजूद, हजारों निवासी अब भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुए सर्वेक्षण में यह सामने आया कि मनपा द्वारा नल कनेक्शन दिए जाने के बावजूद ८३ लोग कुओं, ५९ लोग बोरवेल और ५२ लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। इसका सीधा मतलब है कि जल आपूर्ति प्रणाली में गंभीर खामियां हैं।
सबसे बड़ी समस्या अनियमित जलापूर्ति है। कई इलाकों में पानी कम दबाव में आता है, जिससे बड़े परिवारों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। खासकर अंबोजवाड़ी और मानखुर्द जैसे इलाकों में यह समस्या ज्यादा है। दूसरा बड़ा मुद्दा पानी की गुणवत्ता का है। सर्वेक्षण में ६७.८ फीसदी निवासियों ने त्वचा रोग, ५३.५ फीसदी ने पेट की बीमारियों और २१.८ फीसदी ने मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई) की शिकायत की, जिससे साफ है कि पानी की गुणवत्ता पर मनपा का नियंत्रण कमजोर है।
तीसरी बड़ी खामी जल आपूर्ति में पारदर्शिता की कमी है। डब्ल्यूएफए नीति लागू होने से पहले हजारों लोग पानी खरीदने पर हर महीने २,००० रुपए से ज्यादा खर्च कर रहे थे। मनपा का दावा है कि इस नीति से जल माफियाओं पर रोक लगी है, लेकिन हकीकत यह है कि जल आपूर्ति अब भी वैकल्पिक स्रोतों से हो रही है। यदि जल माफिया खत्म हुए होते तो टैंकरों की मांग क्यों बनी हुई है?
इसके अलावा, मनपा का लक्ष्य १०० फीसदी नल कनेक्शन देना था, लेकिन अब तक केवल १५,००० लोगों को ही कनेक्शन मिले हैं। यह बताता है कि योजना की गति धीमी है और इसे और प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है। मनपा को न सिर्फ जल आपूर्ति में सुधार करना होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हर नागरिक को पर्याप्त और स्वच्छ पानी मिले।

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