शहर के साइक्लाजिस्टों ने जताई चिंता
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की हवा लगातार दूषित होती जा रही है। यह दूषित-जहरीली हवा केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है। यह दूषित हवा मुंबईकरों को ‘पागल’ बना रही है। महानगर के साइकोलॉजिस्टों ने चिंता जताते हुए कहा है कि वायु प्रदूषण से डिप्रेशन, एंग्जायटी के साथ ही मेंटल हेल्थ पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह एक बड़ी मानसिक स्वास्थ्य महामारी का रूप ले सकता है।
वातावरण फाउंडेशन के संस्थापक भगवान केसभट के अनुसार, वर्ष २०२४ से जनवरी २०२५ तक मुंबई में केवल ४९ दिन ही अच्छी वायु गुणवत्ता के रहे, जबकि पिछले साल इस अवधि में ऐसे १२५ दिन थे।
साइलेंट मेंटल हेल्थ क्राइसिस
यह गिरती हुई वायु गुणवत्ता केवल श्वसन समस्याओं का कारण नहीं बन रही, बल्कि यह एक साइलेंट मेंटल हेल्थ क्राइसिस को जन्म दे रही है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही प्रदूषण और मानसिक स्वास्थ्य के बीच सीधा संबंध साबित करने वाला शोध सीमित है, लेकिन प्रदूषण मानसिक बीमारियों के मामलों में वृद्धि कर रहा है।
प्रदूषण बना रहा है लोगों को बीमार!
७३ फीसदी अध्ययनों का निष्कर्ष
मुंबई की हवा काफी प्रदूषित हो चुकी है। ऐसे में यह लोगों को मानसिक रूप से बीमार कर रही है। इस बारे में बंगलुरु के निमहांस में सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनाकरण का कहना है कि इन मरीजों का पता करना मुश्किल है, क्योंकि प्रदूषण और मानसिक स्वास्थ्य के बीच कोई सीधा रिश्ता नहीं हैं। मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि जोशी का कहना है कि ७३ फीसदी अध्ययनों में प्रदूषण के कारण मानसिक स्वास्थ्य लक्षणों में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि ६-७ फीसदी में पहले से मौजूद स्थितियां बिगड़ी हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. सागर ने बताया कि कुछ साल पहले उनके पास तिमाही में एक-दो मामले आते थे, लेकिन अब यह संख्या ५० तक पहुंच गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एक दशक पहले प्रदूषण को मानसिक स्वास्थ्य का कारण नहीं माना जाता था, लेकिन अब यह लगभग १० फीसदी मामलों में भूमिका निभा रहा है।
ये है मुख्य कारण
जानकारों की मानें तो मुंबई में बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उत्पन्न हो रहे धूल, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर उत्सर्जन में वृद्धि के साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। कई मुंबईकरों का कहना है कि लगातार हॉर्न बजने और मेट्रो निर्माण कार्य के कारण उनकी एकाग्रता प्रभावित हुई। उन्हें चिड़चिड़ापन और काम में मन न लगने की समस्या होने लगी। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि उन्हें शुरुआती डिप्रेशन हो गया है, जो ध्वनि प्रदूषण के कारण हुआ।