सामना संवाददाता / मुंबई
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की महिलाओं को अपनी ओर खींचने के लिए चलाई गई ‘लाडली बहन’ समेत कई मुफ्त की रेवड़ियों से सराबोर करनेवाली योजनाओं का साइड इफेक्ट कई महीनों से हो रहा है। लाडली बहन योजना ने सरकार के खजाने को खाली करने में प्रमुख भूमिका अदा की है। इसका असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है। मौजूदा समय में राज्य के स्कूलों में शिक्षा का स्तर घट गया है। इसी में यह जानकारी सामने आई है कि देवेंद्र सरकार ने आरटीई के तहत निजी स्कूलों के बकाए में से केवल ४०० करोड़ रुपयों का भुगतान किया है। देवेंद्र सरकार ने अभी भी २,००० करोड़ लटका रखे हैं। इससे शिक्षा प्राप्त करनेवाले गरीब बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाते हुए दिखाई दे रहा है।
असंवेदनशील है ‘महायुति’ सरकार
नहीं किया गरीब बच्चों की फीस का भुगतान!
१,०१,९६७ छात्रों को लॉटरी सिस्टम के जरिए चुना गया और उन्हें आवंटित सीटों पर प्रवेश देने के लिए २८ फरवरी तक की समय सीमा तय की गई।
महाराष्ट्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए २५ फीसदी सीटें आरक्षित होती हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए सरकार फीस का भुगतान करती है। लेकिन सरकार ने अभी तक इन गरीब बच्चों की फीस का भुगतान नहीं किया है। सिर्फ दिखावे के लिए कुछ रकम दी है।
बता दें कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में इन आरक्षित सीटों पर दाखिला लेने वाले बच्चों को कक्षा एक से आठ तक नि:शुल्क शिक्षा मिलती है। सरकार आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति करती है। इसके तहत २०२५-२६ शैक्षणिक वर्ष के लिए महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। इस साल ८,८६३ स्कूलों में १,०९,०८७ सीटों के लिए कुल ३,०५,१५२ आवेदन जमा किए गए, जिनमें से ५,१५७ सीटें मुंबई में हैं।
कई सालों से लंबित है फंड
प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक शरद गोसावी ने कहा है कि राज्य में निजी स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ रहे लाखों छात्रों का एडमिशन तो हुआ है, लेकिन महायुति सरकार ने स्कूलों का बाकी २,००० करोड़ रुपए के फंड का भुगतान ही नहीं किया है। इससे लाखों गरीब बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता हुआ नजर आ रहा है। हालांकि, विपक्ष के हमलों से अपनी गर्दन बचाने के लिए सरकार ने ४०७ करोड़ का फंड दिया है।
अपर्याप्त है फंड
गोसावी ने कहा कि राज्य सरकार ने मार्च में पांच शासनादेश जारी किए थे, जिनमें प्राथमिक शिक्षा निदेशक, पुणे को फंड जारी करने की घोषणा की गई थी। इसका स्कूल संगठनों ने स्वागत किया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह अभी भी अपर्याप्त है।
अभिभावकों से वसूल करेंगे फीस
महाराष्ट्र इंग्लिश स्कूल ट्रस्टीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संजयराव तायडे पाटील ने कहा है कि हम फंड जारी किए जाने का स्वागत करते हैं। हालांकि, यह फंड अभी भी बकाया राशि का एक छोटा हिस्सा है। हम अभिभावकों से फीस लेंगे और उनका पैसा तभी लौटाएंगे, जब शत- प्रतिशत बकाये राशि का भुगतान हो जाएगा।
कोर्ट में घसीटे जाने के बाद जारी हुआ फंड
इंडिपेंडेंट इंग्लिश स्कूल्स एसोसिएशन की अध्यक्ष जागृति धर्माधिकारी के मुताबिक ये फंड इसलिए जारी किए गए हैं, क्योंकि कुछ स्कूलों ने सरकार को कोर्ट में घसीटा है। वे फंड के मुख्य लाभार्थी होंगे। पुणे और ठाणे जिले में आरटीई स्कूलों की संख्या सबसे अधिक है। इसलिए वे सबसे अधिक संघर्ष करते हैं और जारी किए गए फंड कभी भी पर्याप्त नहीं होते हैं।
यह है नियम
नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम या शिक्षा का अधिकार अधिनियम, २००९, जिसे सामान्यत: आरटीई अधिनियम के नाम से जाना जाता है, शिक्षा को ६ से १४ वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार बनाता है।