अधूरे भवन का उद्घाटन कर नेताओं ने भुनाया बालासाहेब का नाम
जनता को लुभाने के लिए अधूरे काम का उद्घाटन करने में माहिर हैं सरनाईक
प्रेम यादव
भायंदर के गोल्डन नेस्ट परिसर में बनाया जा रहा हिंदूहृदय सम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे कला भवन उद्घाटन के बाद भी अधूरा पड़ा है। चुनावी मौसम में महज दिखावे के लिए इसका उद्घाटन कर दिया गया था, जबकि भवन का निर्माण कार्य पूरी तरह से नहीं हुआ है। उद्घाटन को लगभग पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन भवन में न कोई गतिविधि है और न ही निर्माण में गति। चुनाव के दौरान सत्ताधारी नेताओं ने जमकर वादे किए, विकास के सपने दिखाए और शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के नाम पर जनता से भावनात्मक जुड़ाव बनाया। लेकिन चुनाव के बाद उनके नाम पर बन रहा भवन अभी भी अधूरा है। यह भवन उन दर्जनों परियोजनाओं में से एक है, जो पिछले २ साल में शुरू तो की गईं, लेकिन पूरी नहीं हो पाईं।
११ अक्टूबर २०२२ को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा ३१ जनवरी २०२३ को उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीरा-भायंदर में करीब चार दर्जन विकास कार्यों का भूमिपूजन किया था। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाना था। हालांकि, वर्तमान स्थिति काफी निराशाजनक है। कुल ४० में से केवल ११ के ही कार्य शुरू हो पाए हैं। शेष परियोजनाएं विभिन्न कारणों से अटकी पड़ी हैं या निर्माण की रफ्तार बहुत धीमी है। मुख्य कारणों में भूमि अधिग्रहण की दिक्कतें, आरक्षण की बाधाएं, वित्तीय कर्ज और प्लान की मंजूरी का अभाव शामिल है।
प्रमुख अटकी परियोजनाओं में मीरा-भायंदर मनपा मुख्यालय का निर्माण भी शामिल है। मनपा अस्पताल और प्रस्तावित वैंâसर अस्पताल की योजना भी अधर में है। चेना नदी पर रिवर प्रâंट और बांध, संगीत विद्यालय, महावीर बहुउद्देशीय भवन, शिवसृष्टी और थीम पार्क जैसी सांस्कृतिक योजनाएं भी लटकी हुई हैं।
स्थानीय नेताओं व अधिकारियों की लापरवाही
स्थानीय नेताओं और अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। शहर के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरकार और प्रशासन द्वारा शीघ्र ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
जल्द काम पूरा कराए सरकार
जनता से झूठे वादे कर राजनीतिक लाभ लेना ठीक नहीं है। अगर सरकार ने उद्घाटन किया है तो जल्द काम भी पूरा कराए। जनता अब सवाल कर रही है कि क्या विकास कार्य केवल चुनावी स्टंट बनकर रह गए हैं? क्या कला और संस्कृति के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस अधूरी परियोजना को गंभीरता से लें और जनता की उम्मीदों को टूटने से बचाएं।
-अंकुश मालुसरे, कामगार नेता
केवल दो ही सामाजिक भवनों के काम हुए शुरू
शहर के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित विभिन्न सामाजिक भवनों में से केवल दो पर ही काम शुरू हुआ है। वहीं अरबों रुपए की लागत से प्रस्तावित सीसी रोड का काम भी बहुत धीमी गति से चल रहा है। इन अधूरे प्रोजेक्ट्स के कारण शहरवासियों में निराशा व्याप्त है। जनता को जिन सुविधाओं का वादा किया गया था, वे समय पर नहीं मिल पा रही हैं। विकास की रफ्तार ठप होने से नागरिकों में हताशा और निराशा बढ़ रही है।