मुख्यपृष्ठस्तंभराज ‘तंत्र’ : पलट गए अजीत पवार

राज ‘तंत्र’ : पलट गए अजीत पवार

अरुण कुमार गुप्ता

महाराष्ट्र में बजट सत्र के बाद अब किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा गरमाता दिखाई दे रहा है। डिप्टी सीएम और राज्य के वित्त मंत्री अजीत पवार ने कहा कि मैंने सदन में जवाब देते हुए भी कहा था कि हर मामले में ढोंग किया जा सकता है, लेकिन पैसे के मामले में ऐसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने अपने भाषण में कभी भी किसानों की कर्जमाफी के बारे में बयान नहीं दिया। अजीत ने कहा कि लाडली बहन योजना की वजह से सरकार पर ४० हजार करोड़ का बोझ बढ़ गया है। ऐसे में अब राज्य की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी हम सब की है। उन्होंने कहा कि बतौर वित्त मंत्री मैंने ११ बार बजट पेश किया है। उधर विपक्ष का कहना है कि जिन लोगों को जनता ने भारी बहुमत से सत्ता में बिठाया था, वे अलग तरह की बातें करने लगे हैं। विधानसभा चुनाव में कर्जमाफी का वादा कर महायुति राज्य के किसानों के वोट से जीतकर सत्ता में आई, लेकिन अब कह रही है कि कर्जमाफी नहीं मिलेगी। एक तरह से देखा जाए तो अजीत पवार अपनी जगह सही हैं। चुनाव में वादे तो सिर्फ सत्ता पाने के लिए किए जाते हैं, पूरे करने के लिए नहीं। यदि पवार वादे से पलट गए तो कोई नई बात नहीं है।
माननीयों का जन्मसिद्ध अधिकार
उत्तराखंड में अवैध खनन को लेकर राज्य के पूर्व सीएम और हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान से विवाद बढ़ता जा रहा है। सांसद त्रिवेंद्र सिंह ने राज्य के खान सचिव ब्रजेश संत पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी करते हुए कहा था कि शेर कुत्तों का शिकार नहीं करते। चूंकि अधिकारी ब्रजेश संत दलित समुदाय से आते हैं इसलिए पूर्व सीएम की इस टिप्पणी को जातिसूचक के रूप में देखा जा रहा है, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में विरोध शुरू हो गया है। संसद में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर अवैध खनन होने का दावा किया। हालांकि, खान सचिव ब्रजेश संत ने उनके इन दावों को गलत ठहराते हुए इसे भ्रामक जानकारी करार दिया। इसके बाद, जब त्रिवेंद्र सिंह रावत से ब्रजेश संत के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि शेर कुत्तों का शिकार नहीं करते। इस विवाद के बीच, उत्तराखंड आईएएस एसोसिएशन ने बैठक बुलाई। बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि आईएएस अधिकारी भी आम नागरिकों की तरह सम्मान और गरिमा के हकदार हैं। यहां अधिकारी यह भूल गए कि रावत साहब माननीय हैं और माननीयों को अधिकारियों की तौहीन करने का जन्मसिद्ध अधिकार है। माननीयों के सामने सिर्फ हाथ बांधकर खड़े रहना पड़ता है, सम्मान की बात सोचना बहुत दूर की बात है।
सत्ता की सनक
बिहार के गोपालपुर से जेडीयू विधायक गोपाल मंडल फिर से विवादों में आ गए हैं। पटना में जेडीयू ऑफिस में वक्फ बिल पर पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछे। इस पर वे पत्रकारों से उलझ गए। गोपाल मंडल ने एक पत्रकार से कहा- तुम दामाद हो क्या, जो तुम्हारे सवालों का जवाब दूंगा। इस बात से पत्रकार नाराज हो गए और विधायक को मर्यादा में रहने की चेतावनी दी। दरअसल, पटना के जेडीयू ऑफिस में पत्रकारों ने गोपाल मंडल से वक्फ बिल पर सवाल पूछे थे। विधायक गोपाल मंडल को यह पसंद नहीं आया। जब विधायक ने तेवर दिखाने की कोशिश की तो पत्रकार भी गुस्से में आ गए। इससे स्थिति बेकाबू हो गई। जेडीयू नेताओं ने विधायक को शांत करने की कोशिश की। उन्हें एक कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया गया, लेकिन यहां पत्रकार मित्र यह भूल गए कि मंडल जी माननीय हैं और माननीयों को कुछ भी बोलने की आजादी जो रहती है। यदि कोई आम व्यक्ति टिप्पणी करे या सवाल खड़ा करे तो माननीय बर्दाश्त नहीं कर सकते। या यूं कहें कि सिर पर सत्ता की सनक जो सवार रहती है।

अन्य समाचार