कविता श्रीवास्तव
स्टार्टअप के नवाचार से देश में कई क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। आज हर जगह ऑनलाइन शॉपिंग के अलावा रोजमर्रा की जरूरतों की सामग्रियां जैसे दूध, सब्जी, नमक तेल से लेकर तैयार फूड आइटम्स के लिए भी तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स सक्रिय हैं। इनसे जुड़े लाखों डिलिवरी बॉयज और उन्हें संचालित करने वाले नेटवर्क ने व्यापार का तगड़ा जाल बिछाया है। इसके जरिए अनेक लोगों को रोजगार मिला है। ऐसे कारोबार से सरकार को खासी रकम टैक्स के रूप में भी मिल रही है। नए रोजगारों का सृजन हुआ है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बीते दिनों स्टार्टअप की इस चलन पर टिप्पणी की थी। उन्होंने स्टार्टअप समुदाय से कहा था कि वे अपना ध्यान किराना सामान की आपूर्ति और आइसक्रीम बनाने से हटाकर सेमीकंडक्टर, मशीन लर्निंग (एमएल), रोबोटिक्स जैसे उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्र पर लगाएं। उन्होंने नवाचार प्राथमिकताओं पर निराशाभरी टिप्पणी की, जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय नवाचार ने ही आज चमत्कार किया है। आज छोटी-मोटी वस्तुओं के लिए दुकान-दुकान पहुंचने की जरूरत लोगों को नहीं है। सारी चीज घर बैठे ही डिलिवर हो रही हैं। इससे जुड़े लाखों लोगों को रोजगार मिला है। इससे अच्छी रकम टैक्स के रूप में सरकार के खाते में जा रही है। यदि नेतागण इसकी आलोचना करते हैं तो यह उनकी अपनी सोच है। प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार को बढ़ावा देने में ‘उपभोक्ता इंटरनेट कंपनियों’ की भूमिका भी सराहनीय है। सरकार तथा भारतीय पूंजी बाजार को ऑनलाइन के नए ट्रेंड और स्टार्टअप के नवाचार से अच्छा मार्वेâट मिला है। बेरोजगारी की समस्या को हल करने में भी कुछ मदद मिली है, जबकि वस्तुत: इसके लिए प्रभावी ढंग से प्रयत्न करना सत्ताधारी पक्ष का काम है। स्टार्टअप के नवाचार की आलोचना इस कारोबार से जुड़े लाखों लोगों को हतोत्साहित करने जैसा है। हम अपने स्टार्टअप की तुलना अमेरिका और चीन के साथ नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वहां के बुनियादी ढांचे और हमारे बुनियादी ढांचे में जमीन आसमान का फर्क है। ऑनलाइन उत्पादों और सेवाओं के लिए भारत में बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं। जेप्टो, ओला, उबर, जोमैटो से लेकर फ्लिपकार्ट और अमेजॉन जैसी अनेक सेवाओं का देश में जाल बिछा हुआ है। वास्तविकता यह है कि आज लगभग १.५ लाख लोग केवल जेप्टो से आजीविका कमा रहे हैं। यह एक ऐसी कंपनी है, जो लगभग साढ़े तीन साल पहले अस्तित्व में ही नहीं थी। हम अपने स्टार्टअप को चीन के रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग, ३डी विनिर्माण और भविष्य के कारखाने आदि के सामने कम दिखाकर केवल राजनीतिक उद्देश्य साध सकते हैं, परंतु वास्तविक जीवन में आज यही सेवाएं घर-घर को लाभ पहुंचा रही हैं। इससे वैश्विक स्तर पर व्यवसाय कर रही कंपनियों को भी चुनौती मिली हुई है। देश का यह नवाचार आलोचना का नहीं, प्रशंसा का पात्र है। राजनेता इनकी आलोचना करने की बजाय सुखी भारत बनाएं।