मुख्यपृष्ठस्तंभ`बिजली दर स्थगन का करंट !'

`बिजली दर स्थगन का करंट !’

मित्रों, महाराष्ट्र के बिजली उपभोक्ताओं की हालत अब दयनीय हो चुकी है। महावितरण (MSEB) के ताले बंद करने लायक हो गए हैं, लेकिन सरकार अपनी “शानदार” नीतियों से इस अंधेरे को और गहरा कर रही है !
अब देखिए–महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) ने नया बिजली दर आदेश जारी किया था, जो 1 अप्रैल से लागू होने वाला था। मगर महावितरण को उसमें “गड़बड़ी” दिखी! इसलिए उसे तुरंत स्थगित कर दिया गया। यानी आम जनता को लगा कि बिजली का बिल थोड़ा कम होगा, लेकिन सरकार ने झटका दे दिया–”बिल कम नहीं होगा, जैसे थे वैसा ही रहेगा!”
वक्फ सुधारना बिल और ट्रंप के टैरिफ का बिजली बिल से क्या संबंध ?
मित्रों, इस देश में अब एक नया ट्रेंड चल पड़ा है। सरकार के हर फैसले को किसी न किसी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे से जोड़ दिया जाता है ! अब बिजली दर स्थगन का संबंध वक्फ सुधारना बिल और डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसले से जोड़ा जा रहा है! मतलब, अगर कोई पूछें, “बिजली का बिल क्यों बढ़ रहा है?” तो जवाब मिलेगा- “ट्रंप से पूछिए!” कोई बोले, “हमें क्या सजा मिल रही है?” तो जवाब आएगा,”पहले वक्फ बोर्ड के नियम समझो!” सरकार ने अब जनता को भ्रमित करने की ट्रेनिंग ले ली है। जब लोग असली सवाल पूछें, तब चर्चा को किसी और मुद्दे पर घुमा दो !
बिजली दर स्थगित ! लेकिन राहत नहीं !
अब बिजली उपभोक्ताओं की हालत क्या है? साधारण जनता को लगा कि 850 रुपए का बिल 1 अप्रैल से 100-150 रुपए कम होगा… लेकिन सरकार ने सीधा करंट मारते हुए कहा, “कुछ भी नहीं बदलेगा! जैसे पहले रो रहे थे, वैसे ही आगे भी रोते रहो!” पिछले कई सालों में किसी भी उपभोक्ता को ये महसूस नहीं हुआ कि बिजली बिल कम हो रहा है, लेकिन सरकार बार-बार कहती है, “हम जनता को राहत देने के फैसले लेते हैं!” ये राहत वैसी ही है, जैसी लोडशेडिंग में जली हुई ट्यूब लाइट !
महावितरण का हिसाब और जनता की फजीहत !
महावितरण की तरफ से कहा गया कि हम मुनाफे में नहीं, घाटे में हैं ! अब अगर महावितरण के दिमाग में 440 वोल्ट का मीटर लगाकर भी जांच कर लें, तो भी ये घाटा कैसे हो रहा है, कोई समझ नहीं पाएगा ! सरकार उद्योगपतियों के अरबों रुपए माफ कर सकती है, सांसदों के वेतन बढ़ा सकती है, लेकिन आम जनता को बिजली बिल में 1 रुपए की राहत भी नहीं दे सकती !
क्या जनता कभी सवाल पूछेगी ?
मित्रों, महावितरण, सरकार और सत्ता में बैठे हुक्मरानों को एक ही बात पर भरोसा है– “जनता कभी आवाज नहीं उठाएगी!” इसलिए आज बिजली दर स्थगित होता है, कल बढ़ता है, परसों फिर स्थगित होता है। ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा ! जब तक जनता सच में बिजली दर वृद्धि के खिलाफ “झटका-प्रूफ आंदोलन” नहीं करती, तब तक सरकार “महावितरण” के नाम पर उपभोक्ताओं को “तगड़ा करंट” देती रहेगी !
-शब्दांकन राजन पारकर

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