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यूपी में असली मरीज, फर्जी मरीज का खेल … एंबुलेंस बुकिंग के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी! …१०२, १०८ की होती है फर्जी बुकिंग

एक ही नंबर से की जाती है कई बार कॉल 
सरकार से कराए जाते हैं करोड़ों का भुगतान

सामना संवाददाता / लखनऊ 
उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस बुकिंग के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी चल रही है। जिसे सुनकर आपके भी होश फाख्ता हो जाएंगे। बताया जाता है कि कई जिलों में एंबुलेंस बिना मरीजों के ही इधर से उधर घूमती रहती है। साथ ही एक ही मोबाइल नंबर से कई बार कॉल करके एंबुलेंस को बुलाया जाता है। जितनी फर्जी बुकिंग होती है, वो रिकॉर्ड में दर्ज होती जाती है। इसके बाद सरकार से उसका भुगतान करा लिया जाता है। इस तरह से हर महीने करोड़ों रुपए की चपत सरकार को लगाई जा रही है।
कई जिलों से सामने आए मामले 
एक रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले यूपी के चार जिलों में एंबुलेंस १०२ और १०८ पर नजर रखी गई थी। इसी कड़ी में अयोध्या जिले में एंबुलेंस सेवा के लिए काम कर चुके एक शख्स ने बताया कि उन्हें दिनभर में आठ केस करने होते थे और किसी खास दिन पर २० केस भी आ जाते थे। शख्स ने आगे बताया कि ज्यादा केस के दबाव के कारण एंबुलेंस के ड्राइवर को किसी भी हॉस्पिटल के बाहर ही फर्जी तरीके से एंबुलेंस बुकिंग कराया जाता है। जिसके बाद एंबुलेस की गाड़ी बताई हुई जगह पर पहुंच जाती है। इसके बाद किसी भी मरीज को एंबुलेंस में बैठा कर फोटो और लोकेशन के साथ ऐप पर अपलोड कर दिया जाता है। इसी तरह दूसरे फोन में भी कई खीचीं हुई फोटो को अपने फोन से ले लेते हैं।
जांच के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
रिपोर्ट में बताया गया है कि आंबेडकर नगर में एंबुलेस धांधली की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही हैं। इसके अलावा देवरिया जिले में भी जांच करने पर ८ हजार केस सामने आए, तो वहीं वाराणसी में २०२१ के मुकाबले २०२२ में तीन गुना ज्यादा केस मिले, जबकि लखीमपुर में २०२२ के फरवरी-मार्च-अप्रैल में १०२ एंबुलेंस पर २९,५३४ केस दर्ज कराए गए। साथ ही बहराइच में फर्जी केस पर १७ करोड़ रुपए का सरकार की तरफ से भुगतान कराया गया है। ऐसे ही कुल १५ जिलों में जांच करने पर हजारों फर्जी केस पाए गए, लेकिन जांच के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

असली मरीजों तक नहीं पहुंचती है सेवा 
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपी में एंबुलेंस सेवा चलाने वाली जीवीके ईएमआरआई कंपनी को १०२ एंबुलेंस के हर केस के लिए ३,५०० रुपए तो १०८ एंबुलेंस को हर महीने १ लाख ३४ हजार रुपए दिए जाते हैं, हर रोज एंबुलेंस को ६ केस लाने होते हैं। अगर इससे ज्यादा केस आ गए तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से कंपनी को एक्स्ट्रा पैसा दिया जाता है, इसलिए कई बार एंबुलेंस का बिल महीने में ३-३ लाख रुपए आ जाता है। एंबुलेंस चलाने वाले ड्राइवर इस बात को मानते हैं कि फर्जी केस में फंसे होने के कारण जो असली केस होता है, वहां वे पहुंच ही नहीं पाते हैं, जिस कारण मरीजों की जान चली जाती है।

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