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उल्हासनगर में पानी को लेकर घमासान…लीकेज के कारण पानी की हो रही है बरबादी…पीने के पानी से बन रही हैं अवैध इमारतें

अनिल मिश्रा / उल्हासनगर 

उल्हासनगर में इन दिनों बढती गर्मी में पीने के पानी की मांग मनपा प्रशासन के लिए टेंशन बन गया हैl आए दिन मनपा प्रशासन के पास बढ़ते निवेदन, आंदोलन ने नवनियुक्त आयुक्त मनीषा आव्हाले की परेशानियों की बढा दी हैं। पानी की चुनौती को स्वीकार करते हुए मनपा प्रशासन ने उल्हासनगर शहर में पानी की चोरी, लिकेज, निर्थक दुरुपयोग पर रोक लागाने में जलापूर्ती विभाग लागा है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कल्याण जिलाप्रमुख धनंजय बोडारे ने बताया कि उल्हासनगर में पानी की वितरण प्रणाली, भारी लीकेज, पानी की चोरी को रोकने में मनपा का जलापूर्ति विभाग फेल है। किसी जगह पर कई घंटे पानी रहता है, तो कहीं-कहीं पर मिनट भर भी नहीं आता है। किसी-किसी घर, इमारतों में कई लाइनें हैं l लीकेज की रोकथाम के नाम पर अब तक करोडों रुपए पानी में बहाया गया, परंतु पानी का लीकेज बंद नहीं हो सका है। पहला शहर उल्हासनगर है, जहां पर सप्ताह में एक दिन पानी पूरी तरह से पानी की लाइन से हो रहे लिकेज की मरम्मत के लिए बंद किया जाता है। इसके बावजूद लीकेज निरंतर शुरू रहता है l पानी की टांकी में लीकेज होता है, उसे देखकर भी विभाग कार्रवाई नहीं करता है l लीकेज की मरम्मत के लिए वेल्डिंग मशीन नहीं है। आदमी नहीं हैं l साइकिल के ट्यूब से लीकेज बंद किया जाता है l ट्यूब से कितने दिन तक लीकेज बंद रखा जा सकता है?
उल्हासनगर विभाग एक के उप अभियंता दीपक डोले ने बताया कि उल्हासनगर में रोड छाप प्लंबरों ने पानी वितरण के ढांचे को बिगाड़कर रख दिया है l इमारत के नीचे की पानी की टंकी को भर कर ऊपरी टांकी से पानी लेने की बजाय हैवी मोटर से घर-घर पानी लिया जाता है l विभागीय मान्यता के बगैर ही रात को, छुट्टी के दिन कनेक्शन किया जाता है l पानी भरपूर है, लेकिन अन्य शहरो की तरह से काम न किए जाने से पानी की समस्या पैदा हुई है। सबसे बडी़ बात तो यह है कि उल्हासनगर में पानी का महत्व लोगों को शायद पता ही नहीं है ? पीने के पानी से इमारतें बनाई जाती हैं l वाहनों की सफाई की जाती है l घरेलू लाइन टूट जाती है, तो उसे स्वयं बनाने चाहिए l परंतु लोगों की मानसिकता रहती है कि उसे मनपा बना कर दे, जो कि गलत है l

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