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अनाप-शनाप चालान से परेशान … वाहन चालक करेंगे गडकरी का बहिष्कार! …जनता को लूटकर हीरो नहीं बनने देंगे मुंबईकर

-२०२९ में नागपुर से सड़क मंत्री की कराएंगे जमानत जप्त

द्रुप्ति झा / मुंबई
मायानगरी मुंबई के लोग ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य क्षेत्रों से मुंबई आनेवाले लोग भी टोल के झोल से परेशान हैं। दूसरी ओर लोगों का कहना है कि केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अपने वादे पर खरे उतरते नजर नहीं आ रहे हैं। वे जनता को सिर्फ चूरन देते हैं। कुछ माह पहले महायुति सरकार ने कहा था कि सभी टोल नाके टोल प्रâी होंगे, लेकिन यह भी पीएम नरेंद्र मोदी की तरह जुमला ही साबित हुआ। टोल मुक्ति तो छोड़िए और ज्यादा वसूली हुई है। खुद गडकरी ने यह बात संसद में कही कि जितने बजट की सड़कें नहीं बनी, हमने उससे ज्यादा टोल वसूला है। अब सवाल यह है कि इतना टोल आखिर किसके पेट में गया?
उल्लेखनीय है कि सुविधा के नाम पर टोल वसूली की जाती है, लेकिन धरातल पर देखा जाए तो टोल प्लाजों पर न कोई सुविधा है, न ही व्यवस्था, फिर भी टोल वसूला जा रहा है। कई बार तो ऐसी भी शिकायतें आई हैं कि जिस टोल से लोग कभी गुजरे ही नहीं, वहां भी टोल कट गया। गाड़ी घर की पार्विंâग में खड़ी है और टोल नागपुर में कट रहा है।
मुंबई में टोल नाकों को लेकर लोगों को कई तरह की परेशानियां हैं, जिनमें लंबी कतारें, टोल की बढ़ती कीमतें और वैकल्पिक रास्तों की कमी शामिल हैं, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ते हैं।

टोल नाकों पर लंबी कतारें
मुंबई में टोल नाकों पर समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अक्सर लंबी कतारें लगती हैं, जिससे लोगों का काफी समय बर्बाद होता है। कुछ जगहों पर टोल नाकों के पास वैकल्पिक रास्ते नहीं हैं, जिससे लोगों को टोल चुकाने के लिए मजबूर भी होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अनाप-शनाप चालान वसूली से नाराज वाहन चालकों ने गडकरी के बहिष्कार का एलान किया है। उनका कहना है कि गडकरी को हीरो नहीं बनने देंगे। २०२९ को चुनाव में उनकी जमानत जप्त कराएंगे।

टोल टैक्स को लेकर दूर
नहीं हुईं लोगों की शिकायतें
गडकरी ने किया था समान टोल नीति का वादा

दरअसल, २०२५ के फरवरी माह में एक साक्षात्कार में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि टोल टैक्स को लेकर लोगों की शिकायतें जल्द दूर होनेवाली हैं, साथ ही कहा था कि सड़क परिवहन मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों को राहत देने के लिए एक समान टोल नीति पर काम कर रहा है, लेकिन न तो लोगों को इसकी जानकारी है और न अभी तक टोल टैक्स को लेकर लोगों की शिकायतें दूर हुई हैं।
उल्लेखनीय है कि सड़कों पर हुए खर्च की तुलना में ज्यादा टोल वसूला जा रहा है। गडकरी ने यह भी कहा था कि मैं चाहता हूं कि गरीब लोग भी हाइवे कंस्ट्रक्शन में इन्वेस्ट करें और बैंकों द्वारा जमा पर दिए जाने वाले ४.५ प्रतिशत की तुलना में हम उनके लिए ८.०५ प्रतिशत ब्याज की पेशकश करेंगे, लेकिन इसका क्या फायदा, जब आम जनता ही टोल टैक्स अपनी जेब से भरे। उसके बावजूद टोल पर अच्छी सुविधा लोगों को नहीं मिले। टारगेट पूरा होने के बाद भी लोगों से जबरन टोल वसूला जा रहा है।
जब सड़कें खराब हैं तो जनता इतना टोल क्यों दे?
सड़क निर्माण की लागत में मेंटेनेंस और लंबे समय तक चलनेवाले खर्च भी शामिल होते है, किसी हाइवे पर टोल की राशि इस पर निर्भर करती है कि वहां ट्रैफिक कितना है, किस तरह के वाहन चलते हैं और वो किन शहरों से जुड़ी हुई है। सड़कें सही नहीं फिर भी इतना टोल लेकर सरकार अपनी जेब भरने में लगी हुई है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बावजूद सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा। खराब सड़कों के बावजूद जनता से जबरन टोल लिया जा रहा है। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत में बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत टोल वसूली तय समय के लिए होती है। अगर टोल कलेक्शन, लागत से कई गुना ज्यादा हो जाए तो उसे बंद करना चाहिए या फिर रेट कम करने चाहिए।

आत्म सम्मान मंच के अध्यक्ष और अधिवक्ता नित्यानंद शर्मा ने कहा कि सरकार जो बड़े-बड़े वादे करती है, उनको निभाना भी चाहिए। ये बड़े-बड़े वादे सिर्फ पेपर पर ही न हों, बल्कि वास्तव में भी दिखना चाहिए। तब लोगों को ‘फील गुड’ का एहसास होगा। कांग्रेस सदस्य चंद्रेश दुबे का कहना है कि मैं अमदाबाद से आया हूं और आते-आते मुझे १३ से १४ टोल से गुजरना पड़ा है। कितने किलोमीटर दूरी पर टोल लेना चाहिए, वही तय नहीं है। सरकार इसको लेकर भ्रष्टाचार कर रही है।

वित्तीय वर्ष २०२३-२४ में
टोल वसूली का आंकड़ा
उत्तर प्रदेश में टोल वसूली: ६,६९५.४० करोड़ रुपए
राजस्थान में टोल वसूली: ५,८८५.०३ करोड़ रुपए
महाराष्ट्र में टोल वसूली: ५,३५२.५३ करोड़ रुपए

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