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पांचोपीरन दरगाह पर नहीं लगने देंगे हिंदुओं के अपमान का प्रतीक मेला -हिंदूवादी संगठन

•विहिप, गौरक्षा वाहिनी, हिंदू महासंघ आदि संगठनों का प्रदर्शन, लगे नारे ‘गाजी-पाजी नहीं चलेगा’

•सावनी मेला व उर्स पर रोक की मांग,सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन

सामना संवाददाता/सुल्तानपुर

संभल, बहराइच के बाद अब मुस्लिम आक्रांता सैय्यद सालार मसऊद गाज़ी के पांच सिपहसालारों की सुल्तानपुर स्थित कब्रगाह पांचोपीरन में लगने वाले सावनी मेला पर हिंदूवादी संगठनों ने प्रश्नचिह्न उठा दिया है। शनिवार को इन संगठनों ने सुल्तानपुर कलेक्ट्रेट में सैय्यद सालार गाज़ी के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन करने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। जिसके जरिये शहर में गोमती किनारे स्थापित पांचोपीरन दरगाह में हरेक साल सावन माह में लगने वाले सावनी मेले को हिंदू अपमान का प्रतीक बताते हुए इसपर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

जैसा कि विदित है कि यूपी के सुल्तानपुर शहर में गोमती के दक्षिणी तट पर सैकड़ों साल पुरानी पांचोपीरन दरगाह है। सरकारी अभिलेखों व जनश्रुतियों के अनुसार इस दरगाह में मुस्लिम आक्रांता महमूद गजनवी के भांजे सैय्यद सालार मसऊद गाज़ी के सिपहसालारों की कब्रे हैं। जिन्हें तत्कालीन कुशपुर के भर राजा नंदकुंवर ने मार गिराया था। इसी दरगाह पर हरेक साल सालाना उर्स व सावनी मेला लगता है। बताते हैं कि सावनी मेला कुशपुर के अंतिम हिंदू शासक राजा नंदकुंवर पर मुस्लिम आक्रांता खिलजी की विजय के ‘उल्लास’ व हिंदुओं के अपमान का प्रतीक है। जिसके विरोध में गौरक्षा वाहिनी प्रमुख सर्वेश सिंह की अगुवाई में विश्व हिंदू महासंघ व विहिप आदि हिंदूवादी संगठनों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। ‘गाज़ी-पाज़ी’ के नारे खूब लगाए गए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट में सीएम योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट विदुषी सिंह को सौंपा। जिसमें तत्काल पांचोपीरन के सालाना उर्स व सावनी मेले पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि आवश्यक कदम शीघ्र नहीं उठाए गए तो हिंदूवादी संगठन सीधी कार्रवाई करेंगे। इस अवसर पर विश्व हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष कुंवर दिनकर प्रताप सिंह, सिद्धार्थ शुक्ल, जयशंकर दूबे,दिवाकर सिंह आदि उपस्थित रहे।

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